Hindu Belief: भारतीय संस्कृति में घर का मुख्य द्वार बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. चौखट इसी द्वार का के अहम हिस्सा है. यह आपने भी देखा होगा कि लोग सुबह-सुबह उठकर सबसे पहले दरवाजे की सफाई करते हैं और चौखट पर शुभ चिह्न बनाते हैं. इसके पीछे मान्यता यह है कि चौखट को बैठने या पैर रखने की जगह नहीं, बल्कि सम्मान देने योग्य स्थान माना गया है. आइए जानते हैं कि बड़े-बुजुर्ग चौखट पर बैठने से क्यों रोकते हैं और इससे जुड़ी सदियों पुरानी वजह और पौराणिक मान्यता क्या हैं?
लक्ष्मी-गणेश का वास
लोकमान्यता यह है कि घर के मुख्य द्वार पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का वास होता है, जिसे घर के बरकत से जुड़ा माना गया है. कहते हैं कि चौखट पर बैठने से उनका अपमान होता है और घर में दरिद्रता आती है. यह भी विश्वास है कि चौखट पर बैठने से देवी-देवताओं के आने-जाने का रास्ता बाधित होता है, जिससे घर में सौभाग्य घटता है. इसलिए बड़े-बुजुर्ग इसे अशुभ मानते हैं और चौखट पर बैठने से मना करते हैं.
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पौराणिक कथा
हिन्दू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर असुर राजा हिरण्यकश्यप का वध घर की चौखट पर ही किया था. हिरण्यकश्यप को वरदान था कि वह न घर के अंदर मर सकता है और न बाहर. शाम के समय भगवान नरसिंह ने उसे चौखट पर रखकर अपनी जांघों रखकर पर अपने नाखून से उसका वध किया था. इसलिए चौखट को 'वध स्थल' माना गया और इसे अशुभ माना जाने लगा. यही कारण है कि सनातन धर्म में चौखट पर बैठना, लेटना या पैर रखना मना है.
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वास्तु का नजरिया
वास्तु शास्त्र के अनुसार, चौखट घर के भीतर की सकारात्मक ऊर्जा और बाहर की नकारात्मक ऊर्जा के बीच की सीमा होती है. वास्तु में चौखट को घर का 'मुख' माना गया है, इसलिए इसका सम्मान करना बेहद जरूरी है. मान्यता है यहां बैठने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे धन, संपत्ति, स्वास्थ्य और समृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ता है. आपको बता दें कि चौखट पर पैर रखकर घर में प्रवेश करना भी अशुभ माना गया है.
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रोजाना करें ये काम
घर की चौखट को हमेशा सम्मान दें. सुबह उठकर इसे साफ करें और शुभ चिह्न, जैसे स्वस्तिक आदि बनाएं. चौखट पर कभी न बैठें, न पैर रखें और न ही कोई सामान रखें. इसे हमेशा स्वच्छ और खुला रखें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे. याद रखें, जो चीजें हमारे पूर्वजों ने सदियों तक निभाई हैं, उनके पीछे हमेशा कोई न कोई गहरी समझ होती है. चौखट का सम्मान करना भी उसी समझ का हिस्सा है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.