नेपाल में भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने करीब पांच दशक पुराने चीन के बांध हादसे की यादें ताजा कर दी हैं. बहुत कम लोगों को पता होगा कि अगस्त 1975 में चीन के हेनान प्रांत में बानचियाओ बांध टूटने से ऐसी तबाही मची थी, जिसे आज भी दुनिया की सबसे घातक बाढ़ आपदाओं में गिना जाता है. ये बांध उस समय चीन की नदियों के बहाव को कंट्रोल करने के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते थे और सोवियत इंजीनियरों की मदद से री-कंस्ट्रक्ट भी किया गया था.
बानचियाओ बांध को 1951-52 के दौरान रू नदी पर बनाया गया था. इसका इस्तेमाल बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए होना था. बांध में कुछ वर्षों बाद दरारें सामने आईं, जिसके बाद 1955-56 में इसे सोवियत एक्सपर्ट्स की सलाह पर मजबूत किया गया. इसके बाद इसे ‘आयरन डैम’ यानी लोहे का बांध कहा जाने लगा.
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तीन दिन में हुई एक साल जितनी बारिश
चीन में आई भीषण बाढ़ का मुख्य कारण टाइफून नीना को बताया गया, जिसकी वजह से जोरदार बारिश हुई. 5 से 7 अगस्त 1975 के बीच लिंझुआंग में 1,605 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. बानचियाओ में भी तीन दिनों के दौरान 1,422 मिलीमीटर बारिश हुई. सिर्फ 7 अगस्त को वहां 784 मिलीमीटर पानी बरसा. भारी बारिश के कारण बांध में पानी आने की रफ्तार करीब 13,000 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच गई, जबकि इसकी निकासी क्षमता लगभग 1,700 घन मीटर प्रति सेकंड थी. लगातार बढ़ते दबाव के बीच 8 अगस्त की आधी रात के बाद बांध टूट गया.
एक के बाद एक कई बांध हुए फेल
बानचियाओ से करीब 32 किलोमीटर दूर शिमानतान बांध भी टूट गया. इसके बाद कई छोटे बांध भी एक के बाद एक ढह गए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुल 62 बांध एक रात में टूटे थे. बानचियाओ से निकला पानी छह घंटे में करीब 70.1 करोड़ घन मीटर तक पहुंच गया और बाढ़ का फैलाव 10 से 15 किलोमीटर तक हो गया. इस आपदा में शुरुआती तौर पर करीब 62000 लोगों की जान गई, जबकि बाढ़ के बात फैली भुखमरी और बीमारियों के चलते करीब एक लाख और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. हालांकि मृतकों के आधिकारिक आंकड़ों को लेकर पुष्टि नहीं की जा सकी है. बाद में चीन पर इस आपदा से होने वाले लोगों की मौत की जानकारी छिपाने का भी आरोप लगा.
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