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‘डेथ ट्रैप’ क्यों है ब्राजील की रोप जंपिंग, रस्सी बंधी होने पर भी सुरक्षा की गारंटी नहीं, वजह जान हो जाएंगे हैरान

बिना सुरक्षा रस्सी (सेफ्टी रोप) के मारिया को पुल से नीचे धकेलने का वीडियो तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो गया. इस भयावह घटना के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या रस्सी बंधी होने पर भी यह गतिविधि सुरक्षित थी?

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दुनिया में अक्सर कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जो सोचने पर मजबूर कर देते हैं. हाल ही ब्राजील के साओ पाउलो में 21 वर्षीय मारिया एडुआर्डा रोड्रिग्स डी फ्रीटास की रोप जंप के दौरान मौत हो गई. हैरानी की बात ये है कि रोप जंप के कर्मचारियों ने मारिया एडुआर्डा को बिना रस्सी बांधे ही ‘पोंटे डो एस्केलेटो’ (स्कैलिटन ब्रिज) से फेंक दिया. इस गलती के चलते मारिया एडुआर्डा की मौके पर ही मौत हो गई और एक बार फिर भारत समेत पूरे देश में रोप जंप (बंजी जंपिंग) में सुरक्षा को लेकर बहस शुरू हो गई.

बिना सुरक्षा रस्सी (सेफ्टी रोप) के मारिया को पुल से नीचे धकेलने का वीडियो तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो गया. इस भयावह घटना के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या रस्सी बंधी होने पर भी यह गतिविधि सुरक्षित थी? एक्सपर्ट्स और टेक्निकल एनालसिस के अनुसार, यह पूरा सेटअप पहले से ही एक ‘डेथ ट्रैप’ था. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है क्यों?

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बंजी जंपिंग और रोप जंपिंग में क्या होता है अंतर?


ब्राजील की घटना को आमतौर पर लोग इसे बंजी जंपिंग समझ रहे हैं, जबकि यह ‘रोप जंपिंग’ थी. दोनों में बहुत बड़ा तकनीकी अंतर है. बंजी जंपिंग में बेहद लचीली (इलास्टिक) डोरियों का उपयोग होता है, जो नीचे गिरने पर झटके को सोख लेती हैं. इसके विपरीत, रोप जंपिंग में कम खिंचाव वाली नायलॉन की रस्सियों का इस्तेमाल किया जाता है. अगर यह जंप बिना ट्रेनिंग और गलत मैथेमेटिक से की जाए तो नीचे पहुंचते ही शरीर पर जोरदार झटका लगता है, जो रीढ़ की हड्डी और गर्दन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

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ब्राजील में रोप जंपिंग के और भी जोखिम


रोप जंपिंग में रस्सी सीधे ऊपर न बांधकर एक तरफ एंकर की जाती है, जिससे व्यक्ति नीचे गिरकर पेंडुलम की तरह एक बड़े आर्क में झूलता है. इस दौरान वर्टिकल और साइडवेज दोनों तरफ इंसान झूले की तरह झूलता है. इस स्थान पर पुल के नीचे कंक्रीट के विशाल खंभे मौजूद है, अगर रस्सी की लंबाई, एंकर की स्थिति और कूदने वाले के वजन का सटीक गणित न लगाया जाए, तो व्यक्ति के इन कंक्रीट पिलर्स से टकराने की पूरी संभावना रहती है.

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30 साल से लावारिस पड़ा पुल


आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दुर्घटना जिस ‘स्कैलिटन ब्रिज’ पर हुई, वह पिछले 30 वर्षों से अधूरा और लावारिस पड़ा हुआ है. स्थानीय प्रशासन ने इस जगह को पहले ही बेहद संवेदनशील और खतरनाक घोषित किया हुआ था. यहां पहले भी कई गंभीर और जानलेवा हादसे हो चुके थे. फ्री-फॉल जंप में केवल रस्सी न बांधना ही एकमात्र चूक नहीं थी, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी, पुराना बुनियादी ढांचा और अवैध संचालन ने मिलकर इसे पहले ही एक ‘डेथ ट्रैप’ बना दिया था.

First published on: Jun 16, 2026 03:07 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक

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