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दुनिया

Ali Larijani Death: कौन थे अली लारीजानी? जिनकी मौत से हिल गया तेहरान

ईरान के सुरक्षा प्रमुख और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सबसे भरोसेमंद सलाहकार अली लारीजानी की इजरायली हमले में मौत हो गई है. इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को ही इसका दावा किया था, जिसकी पुष्टि अब ईरान ने भी कर दी है. जानें कौन थे अली लारीजानी?

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Edited By : Vijay Jain Updated: Mar 18, 2026 10:50
Who is Ali Larijani

इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग में सुप्रीम लीडर के बाद देश के दूसरे सबसे ताकतवर शख्स माने जाने वाले अली लारीजानी की एक हमले में मौत हो गई है. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) ने बुधवार तड़के आधिकारिक तौर परअली लारिजानी की मौत की पुष्टि की. फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस हमले में लारीजानी के साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी, उनके कार्यालय प्रमुख अलीरेज़ा बायात और कई बॉडीगार्ड्स की भी मौत हो गई है. अली लारीजानी पर यह हमला तब हुआ जब वे तेहरान के बाहरी इलाके में अपनी बेटी से मिलने गए थे. उनकी मौत ईरान के लिए सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद सबसे बड़ा नुकसान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।

कौन थे अली लारीजानी?

अली लारीजानी ईरान की राजनीति और सुरक्षा तंत्र के सबसे शक्तिशाली स्तंभों में से एक थे. रक्षा मामलों और रणनीतिक फैसलों में उन्हें सुप्रीम लीडर के बाद देश का दूसरा सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता था. 2005 में राष्ट्रपति चुनाव लड़े लेकिन हारे. 2005 से 2007 के बीच, वे ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार भी रहे थे. 2008 से 2020 तक लगातार 12 वर्षों तक ईरानी संसद के अध्यक्ष रहे. यह ईरान के इतिहास में एक रिकॉर्ड है. 2020 के बाद दोबारा चुनाव की कोशिश की लेकिन गार्जियन काउंसिल ने रोका। वे संस्कृति मंत्री और ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (IRIB) के प्रमुख जैसे पदों पर भी रहे. अगस्त 2025 में उन्हें ‘सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद’ का सचिव नियुक्त किया गया था.

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क्यों थे लारीजानी ईरान के लिए इतने अहम?

लारीजानी को ईरान के सत्ता ढांचे का ‘चाणक्य’ माना जाता था. वे न केवल एक रणनीतिकार थे, बल्कि जंग में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स IRGC और ईरानी सेना के बीच तालमेल बिठाने की मुख्य जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी. अक्टूबर 2025 में IAEA से सहयोग खत्म किया। हाल ही में ओमान के जरिए अमेरिका से अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल थे, लेकिन हमलों के बाद अमेरिका से बातचीत बंद कर दी और धमकी दी कि अमेरिकी सैनिक ईरान में घुसे तो मार दिए जाएंगे.

बीते शुक्रवार को अल-कुद्स डे परेड में आखिरी बार दिखे थे. ईरान ने उन्हें “ईरान की प्रगति और बाहरी खतरों के खिलाफ एकजुटता के योद्धा” बताया. इस हत्या से ईरान में आक्रोश है. यह जंग में सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद सबसे बड़ा नुकसान है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान की सुरक्षा व्यवस्था और नीति-निर्माण पर गहरा असर पड़ेगा.

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First published on: Mar 18, 2026 10:50 AM

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