अमेरिका ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच तेहरान के अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं. ईरान कई बार अपने देश में होने वाले विरोध प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका की सोची समझी साजिश का आरोप लगा चुका है. अब ट्रंप सरकार के इस फैसले ने ईरान के दावों को और मजबूती दी है. अमेरिका ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचलने के आरोप में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और उनके वित्तीय नेटवर्क पर सख्त प्रतिबंध थोप दिए हैं. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को यह जानकारी दी.
डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर उठाया गया कदम
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर उठाए गए इस कदम को ईरानी लोगों के न्याय के संघर्ष के प्रति अमेरिका की नैतिक जिम्मेदारी बताया. ट्रेजरी के बयान के मुताबिक, प्रतिबंधित अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई का निर्देश दिया और तेल राजस्व की अरबों डॉलर की कमाई को गुप्त चैनलों से हेराफेरी की. लिस्ट में ईरान की सुप्रीम काउंसिल फॉर नेशनल सिक्योरिटी के सचिव अली लारीजानी सबसे बड़ा नाम हैं, जिन पर प्रदर्शन को जबरन दबाने का आरोप है.
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18 अधिकारी और संस्थाएं भी ब्लैकलिस्ट
इसके अलावा, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के चार क्षेत्रीय कमांडर और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी अमेरिका के निशाने पर हैं. अमेरिका का आरोप है कि इन अधिकारियों ने फार्स और लोरेस्तान प्रांतों में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं कराईं. ट्रेजरी ने 18 व्यक्तियों और संस्थाओं को भी ब्लैकलिस्ट किया, जो शैडो बैंकिंग के जरिए ईरानी तेल की काली कमाई को UAE, सिंगापुर और ब्रिटेन की कथित फर्जी कंपनियों से व्हाइट कराते थे.
आरोप है कि इन नेटवर्क्स ने सालाना अरबों डॉलर की हेराफेरी की, जबकि ईरानी जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है. इन प्रतिबंधों से अमेरिका में उनकी संपत्तियां जब्त हो जाएंगी, अमेरिकी नागरिकों को लेनदेन पर पूर्ण रोक लगेगी और विदेशी बैंकों को द्वितीयक प्रतिबंधों का खतरा मंडराएगा.










