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‘इमरान खान के जेल से ट्रांसफर की खबरें अफवाह’, PTI ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को किया खारिज

पाकिस्तान की राजनीति में इमरान खान को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, जहां बयान, अफवाहें और प्रतिक्रियाएं सुर्खियों में हैं और माहौल लगातार बदल रहा है.

Author Written By: Raja Alam Updated: Feb 15, 2026 23:46

पाकिस्तान की सियासत में इमरान खान को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई संस्थापक इमरान खान की रविवार को रावलपिंडी की अदियाला जेल में आंखों की विस्तृत जांच की गई. पांच डॉक्टरों की एक मेडिकल टीम ने करीब एक घंटे तक उनके स्वास्थ्य का जायजा लिया और जरूरी टेस्ट किए. यह जांच सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद हुई है, जिसमें इमरान खान ने दावा किया था कि उनकी दाहिनी आंख की रोशनी केवल 15 प्रतिशत ही रह गई है. जेल अधीक्षक ने उन खबरों को पूरी तरह अफवाह करार दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि इमरान को किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है.

परिवार और निजी डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर विवाद

इमरान खान की बहन नूरीन खानम और अलीमा खानम ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि खान साहब के निजी डॉक्टरों और परिवार को भरोसे में लिए बिना किसी भी तरह का इलाज हमें मंजूर नहीं है. अलीमा खानम ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि वे सरकार द्वारा बनाए गए किसी भी मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेंगे. परिवार का आरोप है कि उन्हें और इमरान के निजी विशेषज्ञों को इस पूरी प्रक्रिया से जानबूझकर दूर रखा जा रहा है, जिससे दाल में कुछ काला होने का शक होता है.

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पीटीआई का कड़ा विरोध और अविश्वास

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने जेल प्रशासन और सरकार के इस रवैये को पूरी तरह गलत बताया है. पार्टी का कहना है कि संवेदनशील मेडिकल मामलों में फैसला लेने का संवैधानिक हक केवल परिवार का है. पीटीआई ने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व को सांकेतिक रूप से बुलाना केवल लोगों का ध्यान भटकाने की एक कोशिश है. इमरान के निजी डॉक्टरों आसिम यूसुफ और फैसल सुल्तान ने मांग की है कि उनकी आंखों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उनका इलाज इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में ही होना चाहिए.

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संसद के बाहर धरना और मानवाधिकार की चिंता

इस बीच इमरान खान के बेहतर इलाज की मांग को लेकर संसद भवन के बाहर विपक्षी गठबंधन का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा. पीटीआई सांसद असद कैसर ने कहा कि वे इमरान के स्वास्थ्य के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संसद भवन के अंदर दवाइयां और जरूरी सुविधाएं भी रोकी जा रही हैं जो जुल्म की इंतिहा है. मानवाधिकार आयोग ने भी इमरान खान और अन्य कैदियों की सेहत पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से मांग की है कि उन्हें तुरंत स्वतंत्र चिकित्सा जांच की सुविधा दी जाए.

First published on: Feb 15, 2026 11:46 PM

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