सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. रविवार को ईरान ने साफ कहा कि अगर अमेरिका ने उस पर सैन्य हमला किया तो उसका जवाब बेहद कड़ा होगा. ईरान ने चेतावनी दी कि जवाबी कार्रवाई में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायली सूत्रों ने दावा किया है कि किसी भी अमेरिकी दखल की आशंका को देखते हुए इजरायल हाई अलर्ट पर है. बढ़ते तनाव ने पूरे इलाके में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है.
ईरानी संसद में क्या कहा गया?
ईरानी संसद में बोलते हुए स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने अमेरिका और इजरायल को कड़े शब्दों में चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो कब्जे वाले इलाके यानी इजरायल, अमेरिकी सैन्य अड्डे और युद्धपोत हमारे वैध निशाने होंगे. कालिबाफ ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े रहे हैं और उनका बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि वह सत्ता के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब हैं. यह बयान बताता है कि ईरान किसी भी हमले की स्थिति में पीछे हटने के मूड में नहीं है.
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सरकार विरोधी प्रदर्शन कितने गंभीर हो चुके हैं?
ईरान इस समय 2022 के बाद सबसे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों का सामना कर रहा है. ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे और इसकी वजह बढ़ती महंगाई बताई जा रही है. धीरे धीरे यह आंदोलन सीधे खामेनेई शासन के खिलाफ बदल गया. अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार अब तक 116 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें ज्यादातर प्रदर्शनकारी शामिल हैं. वहीं 37 सुरक्षाकर्मियों की भी जान जा चुकी है. सरकार का कहना है कि हालात को नियंत्रण में लाने के लिए सख्ती जरूरी है.
अंतरराष्ट्रीय तनाव से हालात कितने बिगड़े?
प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान सरकार ने देश में इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद कर दिया है. इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के मुताबिक ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर के केवल 1 प्रतिशत पर रह गई है. इसके बावजूद सोशल मीडिया पर तेहरान समेत कई इलाकों से विरोध के वीडियो सामने आ रहे हैं. ईरानी सरकारी टीवी ने मारे गए सुरक्षाकर्मियों के जनाजे दिखाए हैं और सरकार ने दंगाइयों पर मस्जिदों और सरकारी इमारतों को जलाने का आरोप लगाया है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं. ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर पहले से तनाव में घिरे पश्चिम एशिया में अब हालात और ज्यादा गंभीर होते दिख रहे हैं.










