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ईरान के झंडे की कहानी… नए-पुराने में क्या है अंतर? इस्लामी क्रांति ने बदल दिया इतिहास

झंडे में नजर आने वाले रंगों का भी अपना अलग महत्व था, जिसमें हरा रंग इस्लाम-समृद्धि, सफेद रंग शांति और लाल रंग साहस-बलिदान का प्रतीक था. ध्वज 1979 की इस्लामी क्रांति तक शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल का आधिकारिक प्रतीक रहा.

Author Written By: Akarsh Shukla Updated: Jan 11, 2026 18:27

ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच अब देश का राष्ट्रीय ध्वज सुर्खियों में है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुराने ईरानी झंडे का ईमोजी नजर आने लगा है, वहीं, लंदन स्थित ईरानी दूतावास पर बीते दिनों एक व्यक्ति ने नया झंडा हटाकर पुराना फहरा दिया. प्रदर्शनकारी ईरान के पुराने झंडे फहरा रहे हैं और जगह-जगह उसे लगा रहे हैं. नए और पुराने झंडे के बीच शुरू हुई ये जंग इतिहास की दिलचस्प कहानी बयां करती है.

ईरान का नए और पुराने झंडे के बीच जंग


ईरान में मुख्य रूप से दो झंडों की चर्चा है, पहला राजशाही काल का पुराना ध्वज जिसमें ध्वज के बीच शेर की आकृति बनी हुई है और दूसरा 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद का वर्तमान ध्वज. आपको जानकर हैरानी होगी कि पुराने झंडे का इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना है. हरा, सफेद और लाल रंग के इस झंडे के बीच में सफेद पट्टी के ऊपर शेर और सूर्य का प्रतीक बना था. ये आकृति शक्ति-साहस और ईरानी धर्मों में दिव्यता का प्रतीक थी. शेर के पंजे में तलवार न्याय और रक्षा का प्रतीक मानी जाती थी.

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इस्लामी क्रांति के बाद बदल गया इतिहास


झंडे में नजर आने वाले रंगों का भी अपना अलग महत्व था, जिसमें हरा रंग इस्लाम-समृद्धि, सफेद रंग शांति और लाल रंग साहस-बलिदान का प्रतीक था. यह ध्वज 1979 की इस्लामी क्रांति तक शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल का आधिकारिक प्रतीक रहा. इस्लामी क्रांति के बाद धार्मिक नेतृत्व ने झंडे से शेर और सूर्य का प्रतीक हटा दिया, साथ में कई और बदलाव किए. वर्तमान ध्वज में हरा, सफेद और लाल रंग बरकरार हैं, लेकिन सफेद पट्टी पर ‘अल्लाहु अकबर’ 22 बार लिखा हुआ है.

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पुराने झंडा क्यों चाहते हैं प्रदर्शनकारी?


यह संख्या इस्लामी क्रांति की सफलता के ईरानी कैलेंडर के अनुसार बहमन मास की 22 तारीख को रेफर करती है. प्रदर्शनकारी पुराने झंडे को इसलिए वापस लाना चाहते हैं, क्योंकि वो धार्मिक कट्टरता से मुक्ति और प्राचीन गौरवशाली पहचान की वापसी चाहते हैं. निर्वासित ईरानी राजकुमार के आह्वान पर चल रहा ये विरोध खामेनेई के खिलाफ है. वहीं, खामेनेई ने राजकुमार को अमेरिकी साजिश करार दिया है.

First published on: Jan 11, 2026 06:27 PM

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