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दुनिया

खामेनेई की मौत के बाद भी ट्रंप का कौन सा सपना अधूरा? पहले 4 दिन का ऐलान, अब 4 हफ्ते का प्लान

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वो कौन सा सपना अधूरा है, जिसे पूरा करने के लिए वह रात दिन एक कर रहे हैं. ट्रंप ने शुरू में दावा किया था कि यह युद्ध महज चार दिनों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब वे चार हफ्तों तक ईरान पर हमला करने की बात कर रहे हैं.

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Edited By : Vijay Jain Updated: Mar 2, 2026 12:02
Donald Trump next move after Khamenei Death

डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले कार्यकाल से ही ईरान के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया हुआ है. अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई टॉप नेता मारे गए. मिसाइल और ड्रोन अटैक से ईरान की लीडरशिप और सैन्य ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य अब तक हासिल नहीं हुआ है. ट्रंप ने शुरू में दावा किया था कि यह युद्ध महज चार दिनों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब वे चार हफ्तों की बात कर रहे हैं. मतलब साफ है कि ईरान ने उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत प्रतिरोध दिखाया है.

क्या है ट्रंप का वो ‘अधूरा सपना’?

ट्रंप का मुख्य उद्देश्य केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह जड़ से खत्म करना और उसे आर्थिक रूप से इतना पंगु बना देना है कि वह ‘प्रॉक्सि वार’ न लड़ सके. खामेनेई के जीवित रहते यह संभव नहीं लग रहा था, क्योंकि वे अमेरिका की किसी भी शर्त पर झुकने को तैयार नहीं थे. खामेनेई की मौत के बाद भी ट्रंप तब तक संतुष्ट नहीं होंगे, जब तक ईरान एक नए और अमेरिका-अनुकूल समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर देता.

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अमेरिका ने पहले कूटनीति, धमकियां और प्रदर्शनों को हवा देने की कोशिश की, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो खामेनेई को निशाना बनाकर उनके साथ ही ईरान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को कुचलने का प्लान बनाया गया. अमेरिका को डर था कि ईरान गुप्त रूप से न्यूक्लियर हथियार विकसित कर रहा है, जो उसके लिए बड़ा खतरा बन सकता था.

खामेनेई मारे गए, फिर भी ट्रंप की हसरत क्यों अधूरी?

खामेनेई और अन्य बड़े नेताओं की मौत के बावजूद ईरान की सत्ता खामेनेई समर्थकों के हाथ में बनी हुई है. ईरान में बड़े पैमाने पर रिजीम विरोधी प्रदर्शन नहीं हुए. कुछ लोग खामेनेई की मौत पर जश्न मना रहे हैं, लेकिन सड़कों पर व्यापक आंदोलन नहीं दिख रहा. इसके उलट, ईरान ने मुंहतोड़ जवाब दिया है. ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसमें 3 अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई एयरबेस को नुकसान पहुंचा.

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ईरान ने खामेनेई की मौत का बदला लेने की कसम खाई है और लगातार पलटवार कर रहा है. ट्रंप को उम्मीद थी कि खामेनेई की मौत से ईरान में सत्ता बदल जाएगी और अमेरिका समर्थक सरकार आएगी, ऐसा नहीं हुआ. ईरान अब भी मजबूती से डटा हुआ है, और युद्ध लंबा खिंचता दिख रहा है. अमेरिका के लिए यह बुरी खबर है क्योंकि उसका असली लक्ष्य अभी अधूरा है.

First published on: Mar 02, 2026 11:53 AM

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