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स्टारलिंक का इंटरनेट ब्लॉक करने की तकनीक चीन-रूस के पास, ईरान के हाथ कैसे लगा ये ‘किल स्विच’?

ईरान सरकार का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है. विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने सोमवार को कहा कि हाल के इंटरनेट प्रतिबंध जल्द हटाए जाएंगे. लेकिन स्थानीय लोग इसे दमन का हथियार मान रहे हैं, जिससे सड़कों पर गुस्सा और भड़क गया है.

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ईरान की खामेनेई सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के बीच एलन मस्क के सैटेलाइट बेस्ड स्टारलिंक इंटरनेट को ब्लॉक कर दुनिया को हैरान कर दिया. हैरान इसलिए क्योंकि स्टारलिंक इंटरनेट को ब्लॉक करने की एक खास तकनीक है, जो कथित तौर पर सिर्फ रूस और चीन के पास है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने यूक्रेन में इंटरनेट बाधित करने के लिए इस खास तकनीक का इस्तेमाल किया था, जबकि चीन ने ताइवान को परेशान करने के लिए तकनीक इजाद की. अब बड़ा सवाल ये है कि ईरान के साथ ये तकनीक कैसे लगी. क्या रूस या चीन ने ईरान सरकार की मदद की?

प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने की कोशिश?


गौरतलब है कि ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने के लिए पूरे देश में इंटरनेट काटे जाने के बाद स्पेसएक्स की सैटेलाइट स्टारलिंक इंटरनेट को बैन करने में भी सफलता हासिल कर ली. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये हाईटेक जैमिंग तकनीक रूस के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और चीन के रिसर्च पर आधारित है, जिसे ईरान ने भी इस्तेमाल किया है.

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इस्लामी शासन के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग


देश में इस्लामी शासन के खिलाफ सड़क पर उमड़ रहे प्रदर्शनों ने ईरानी सरकार को कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया. 8 जनवरी 2026 को गुरुवार शाम 6:45 बजे से पूरे ईरान में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं. क्लाउडफ्लेयर रडार की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट ट्रैफिक लगभग जीरो हो गया, जिसमें IPv6 ट्रैफिक में पहले तेज गिरावट दर्ज की गई. सरकार ने चुनिंदा तरीके से ब्लैकआउट लागू किया, अपने आधिकारिक संचार को चालू रखते हुए आम लोगों की बाहरी दुनिया से कनेक्टिविटी काट दी.

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जल्द हटाए जाएंगे इंटरनेट प्रतिबंध


यहां तक कि VPN और प्रॉक्सी भी बेअसर साबित हुए. सरकार का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है. विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने सोमवार को कहा कि हाल के इंटरनेट प्रतिबंध जल्द हटाए जाएंगे. लेकिन स्थानीय लोग इसे दमन का हथियार मान रहे हैं, जिससे सड़कों पर गुस्सा और भड़क गया है. इस बीच 9 जनवरी को एलन मस्क की स्पेसएक्स ने स्टारलिंक सेवा मुफ्त चालू कर दी, जिसका फायदा उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने सेंसर-मुक्त इंटरनेट हासिल कर लिया.

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ईरान को कैसे मिला ये ‘किल स्विच’?


अनुमान है कि ईरान में 40-50 हजार स्टारलिंक सब्सक्राइबर्स सक्रिय थे, लेकिन ईरानी सेना ने तुरंत कई इलाकों में स्टारलिंक सिग्नल जाम कर दिए. इससे पहले रूस ने यूक्रेन युद्ध में Krasukha-4, Leer-3 और Murmansk-BN जैसे EW सिस्टम से स्टारलिंक को ब्लॉक किया था. चीन ने नवंबर 2025 के रिसर्च में पाया कि 1000-2000 एयरबोर्न जैमर्स से स्टारलिंक को जाम किया जा सकता है. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि ईरान ने इन तकनीकों को मिलाकर ‘किल स्विच’ विकसित किया होगा.

First published on: Jan 12, 2026 08:26 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक

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