पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हालात सामान्य नहीं हो रहे हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने चौंकाने वाला दावा किया है। बीएलए ने ऑपरेशन हेरोफ 2.0 के पूरे होने की बात कही। 31 जनवरी को शुरू हुआ यह ऑपरेशन 6 फरवरी की शाम तक चला। बीएलए ने कहा कि इस अभियान में बलूचिस्तान के 14 शहरों को निशाना बनाया गया था। दावा किया कि इतिहास में सबसे बड़ा, सबसे तीव्र और सबसे संगठित सैन्य अभियान था।
बीएलए ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के 362 से अधिक जवान मारे गए हैं। इसमें पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर, पुलिस और राज्य समर्थित सशस्त्र समूहों के सदस्य शामिल थे। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का घातक हथियार शफीक मेंगल है।
बीएलए ने प्रवक्ता ने बयान जारी कर बताया कि बलूच लड़ाकों ने एक साथ हमले किए और कई स्थानों पर सुरक्षा चौकियों, सैन्य ठिकानों और शहरी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर कंट्रोल कर लिया। साथ ही प्रवक्ता ने दावा किया कि कई शहरों में बलूच लिबरेशन आर्मी की इकाइयों ने लगातार 6 दिनों तक अपनी स्थिति बनाए रखी। इससे पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। कहा कि इसके परिणामस्वरूप समूह के अनुसार राज्य को राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक और सैन्य नुकसान हुआ है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हालात सामान्य नहीं हो रहे हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने चौंकाने वाला दावा किया है। बीएलए ने ऑपरेशन हेरोफ 2.0 के पूरे होने की बात कही। 31 जनवरी को शुरू हुआ यह ऑपरेशन 6 फरवरी की शाम तक चला। बीएलए ने कहा कि इस अभियान में बलूचिस्तान के 14 शहरों को निशाना बनाया गया था। दावा किया कि इतिहास में सबसे बड़ा, सबसे तीव्र और सबसे संगठित सैन्य अभियान था।
बीएलए ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के 362 से अधिक जवान मारे गए हैं। इसमें पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर, पुलिस और राज्य समर्थित सशस्त्र समूहों के सदस्य शामिल थे। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का घातक हथियार शफीक मेंगल है।
बीएलए ने प्रवक्ता ने बयान जारी कर बताया कि बलूच लड़ाकों ने एक साथ हमले किए और कई स्थानों पर सुरक्षा चौकियों, सैन्य ठिकानों और शहरी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर कंट्रोल कर लिया। साथ ही प्रवक्ता ने दावा किया कि कई शहरों में बलूच लिबरेशन आर्मी की इकाइयों ने लगातार 6 दिनों तक अपनी स्थिति बनाए रखी। इससे पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। कहा कि इसके परिणामस्वरूप समूह के अनुसार राज्य को राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक और सैन्य नुकसान हुआ है।