Ayatollah Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आधिकारिक शोक समारोह का ऐलान कर दिया गया है. मिली जानकारी के अनुसार, ये आयोजन 4 जुलाई 2026 को शुरु होगा. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि खामेनेई के शोक समारोह में भारत के जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे. बता दें कि ईरान में आयोजित होने वाले इस शोक समारोह में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे. वहीं, अब दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा होने लगी है, कि खामेनेई का अंतिम संस्कार कैसे होगा. तो चलिए जानते हैं…
क्या होती है गुस्ल की रस्म?
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया गुस्ल से शुरू होती है. यह मृतक की अनिवार्य धार्मिक शुद्धि की रस्म होती है. शिया इस्लामी परंपरा के मुताबिक शरीर को तीन चरणों में धोया जाता है. पहली बार कमल या फिर बेर के पत्ते को पानी में मिलाकर उसी पानी का इस्तेमाल कर शरीर को धोया जाता है. उसके बाद पानी में कपूर मिला उस पानी से शरीर को धोया जाता है. इसके बाद तीसरे चरण में शुद्ध साफ पानी का इस्तेमाल किया जाता है.
सफेद कपड़े से शरीर को लपेटा जाता है
शरीर को धार्मिक रूप से धोने के बाद शरीर को एक सादे सफेद रंग के सूती कपड़े से लपेटा जाता है, जिसे कफन कहते हैं. बता दें कि शिया परंपरा के तहत कफन में आमतौर पर कपड़े के तीन अलग-अलग टुकड़े होते हैं. इसमें लुत्का शामिल है. यह शरीर के निचले हिस्से को ढकता है. इसके बाद कमीज और इजार का इस्तेमाल किया जाता है. यह सिर से पैर तक शरीर को ढकने वाली एक बड़ी चादर होती है. इस प्रक्रिया के दौरान शरीर के उन सात हिस्सों पर कपूर लगाया जाता है जिनका इस्तेमाल इस्लामी सजदे के दौरान किया जाता है.
यह भी पढ़ें- ‘अमेरिका के साथ कोई बात नहीं होगी’, ट्रंप ने कतर में बुलाई मीटिंग तो ईरान ने ठुकराया ऑफर
दी जाती है सार्वजनिक रूप से विदाई
शरीर को कफन पहनाने के बाद पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शन और जनाजे के साथ ले जाया जाता है. इसके बाद अंतिम संस्कार की एक दुआ पढ़ी जाती है जिसे नमाज ए जनाजा कहते हैं. आम इस्लामी नमाजों के जैसे इस नमाज में झुकना या फिर सजदा नहीं किया जाता है.
कैसे होती है दफ्न की रस्म?
इसके बाद पार्थिव शरीर को दफनाया जाता है. कब्र को इस तरह से तैयार किया जाता है कि मृतक का चेहरा मक्का की दिशा की तरफ ही हो. शव को अंदर रखने के बाद कफन कफन की गांठ खोल दी जाती है और चेहरे को जमीन की तरफ लेकिन उसकी दिशा मक्का की तरफ ही की जाती है.
क्या होती है तल्कीन की प्रक्रिया?
वहीं, कब्र को पूरी तरह से बंद करने से पहले एक शिया धर्मगुरु तल्कीन करते हैं. यह एक पारंपरिक पाठ है जिसमें मृतक को आस्था के सिद्धांत और शिया इमाम के नाम की याद दिलाई जाती है. इसके बाद लकड़ी के तख्तों या फिर पत्थरों का इस्तेमाल करके कब्र को बंद कर दिया जाता है और मिट्टी से भर दिया जाता है.
Ayatollah Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आधिकारिक शोक समारोह का ऐलान कर दिया गया है. मिली जानकारी के अनुसार, ये आयोजन 4 जुलाई 2026 को शुरु होगा. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि खामेनेई के शोक समारोह में भारत के जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे. बता दें कि ईरान में आयोजित होने वाले इस शोक समारोह में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे. वहीं, अब दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा होने लगी है, कि खामेनेई का अंतिम संस्कार कैसे होगा. तो चलिए जानते हैं…
क्या होती है गुस्ल की रस्म?
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया गुस्ल से शुरू होती है. यह मृतक की अनिवार्य धार्मिक शुद्धि की रस्म होती है. शिया इस्लामी परंपरा के मुताबिक शरीर को तीन चरणों में धोया जाता है. पहली बार कमल या फिर बेर के पत्ते को पानी में मिलाकर उसी पानी का इस्तेमाल कर शरीर को धोया जाता है. उसके बाद पानी में कपूर मिला उस पानी से शरीर को धोया जाता है. इसके बाद तीसरे चरण में शुद्ध साफ पानी का इस्तेमाल किया जाता है.
सफेद कपड़े से शरीर को लपेटा जाता है
शरीर को धार्मिक रूप से धोने के बाद शरीर को एक सादे सफेद रंग के सूती कपड़े से लपेटा जाता है, जिसे कफन कहते हैं. बता दें कि शिया परंपरा के तहत कफन में आमतौर पर कपड़े के तीन अलग-अलग टुकड़े होते हैं. इसमें लुत्का शामिल है. यह शरीर के निचले हिस्से को ढकता है. इसके बाद कमीज और इजार का इस्तेमाल किया जाता है. यह सिर से पैर तक शरीर को ढकने वाली एक बड़ी चादर होती है. इस प्रक्रिया के दौरान शरीर के उन सात हिस्सों पर कपूर लगाया जाता है जिनका इस्तेमाल इस्लामी सजदे के दौरान किया जाता है.
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दी जाती है सार्वजनिक रूप से विदाई
शरीर को कफन पहनाने के बाद पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शन और जनाजे के साथ ले जाया जाता है. इसके बाद अंतिम संस्कार की एक दुआ पढ़ी जाती है जिसे नमाज ए जनाजा कहते हैं. आम इस्लामी नमाजों के जैसे इस नमाज में झुकना या फिर सजदा नहीं किया जाता है.
कैसे होती है दफ्न की रस्म?
इसके बाद पार्थिव शरीर को दफनाया जाता है. कब्र को इस तरह से तैयार किया जाता है कि मृतक का चेहरा मक्का की दिशा की तरफ ही हो. शव को अंदर रखने के बाद कफन कफन की गांठ खोल दी जाती है और चेहरे को जमीन की तरफ लेकिन उसकी दिशा मक्का की तरफ ही की जाती है.
क्या होती है तल्कीन की प्रक्रिया?
वहीं, कब्र को पूरी तरह से बंद करने से पहले एक शिया धर्मगुरु तल्कीन करते हैं. यह एक पारंपरिक पाठ है जिसमें मृतक को आस्था के सिद्धांत और शिया इमाम के नाम की याद दिलाई जाती है. इसके बाद लकड़ी के तख्तों या फिर पत्थरों का इस्तेमाल करके कब्र को बंद कर दिया जाता है और मिट्टी से भर दिया जाता है.