Bangladesh Parliament Inside Story: बांग्लादेश में आज 12 फरवरी 2026 को 13वीं संसद के गठन के लिए आम चुनाव कराए गए। वहीं 13 फरवरी को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 50 महिला सांसद चुनी जाएंगी, क्योंकि बांग्लादेश की संसद में 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। हालांकि बांग्लादेश भी भारत की तरह एक लोकतांत्रिक देश है और यहां भी भारत की तरह संसदीय व्यवस्था है, लेकिन दोनों देशों की संसद और चुनाव प्रक्रिया में काफी अंतर है।
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बांग्लादेश में एक सदन वाली संसद
बता दें कि भारतीय संसद में 2 सदनों लोकसभा और राज्यसभा की व्यवस्था है, लेकिन बांग्लादेश में एक सदन की व्यवस्था है। भारत की लोकसभा में 545 सीटें और राज्यसभा में 250 सीटें हैं, जिनमें से 238 सीटें चुनाव कराकर भरी जाती हैं, वहीं 12 सांसदों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। इसके विपरीत बांग्लादेशी सांसद के एक सदन में 350 सीटें हैं।
बता दें कि बांग्लादेश की संसद 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' मॉडल के अनुसार काम करती हैं। यहां संसद में वही उम्मीदवार पहुंचता है, जिसे अपने निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं। 300 सीटें मतदान के जरिए भरी जाती हैं। वहीं 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं, जिन्हें चुनाव जीतकर सरकार बनाने वाली पार्टी और विपक्षी दलों में से चुने जाते हैं।
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सांसदों में से ही चुना जाता है अध्यक्ष
बता दें कि बांग्लादेश की एक सदन वाली संसद का अध्यक्ष सांसदों में से ही चुना जाता है। वह संसद का अध्यक्ष होने के साथ-साथ कार्यवाहक राष्ट्रपति भी होते हैं, जो राष्ट्रपति के न होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाते हैं। विदेशों में भी देश का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। संसद भंग हो जाने के बाद अगले अध्यक्ष का चुनाव होने तक संसद की अध्यक्षता भी करते हैं।
बांग्लादेश की संसद में अध्यक्ष के अलावा एक उपसभापति भी चुने जाते हैं, जिनकी संख्या एक से ज्यादा हो सकती है, जो अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन की अध्यक्षता करते हैं। प्रधानमंत्री संसद में सत्तापक्ष और सरकार के नेता होते हैं। वे मंत्रिमंडल के प्रमुख भी होते हैं। वहीं विपक्ष का नेता सबसे विरोधी पार्टी के नेता को बनाया जाता है। वहीं विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा मिलता है और विपक्ष के लिए वह प्रधानमंत्री के समकक्ष नेता होता है।
Bangladesh Parliament Inside Story: बांग्लादेश में आज 12 फरवरी 2026 को 13वीं संसद के गठन के लिए आम चुनाव कराए गए। वहीं 13 फरवरी को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 50 महिला सांसद चुनी जाएंगी, क्योंकि बांग्लादेश की संसद में 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। हालांकि बांग्लादेश भी भारत की तरह एक लोकतांत्रिक देश है और यहां भी भारत की तरह संसदीय व्यवस्था है, लेकिन दोनों देशों की संसद और चुनाव प्रक्रिया में काफी अंतर है।
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बांग्लादेश में एक सदन वाली संसद
बता दें कि भारतीय संसद में 2 सदनों लोकसभा और राज्यसभा की व्यवस्था है, लेकिन बांग्लादेश में एक सदन की व्यवस्था है। भारत की लोकसभा में 545 सीटें और राज्यसभा में 250 सीटें हैं, जिनमें से 238 सीटें चुनाव कराकर भरी जाती हैं, वहीं 12 सांसदों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। इसके विपरीत बांग्लादेशी सांसद के एक सदन में 350 सीटें हैं।
बता दें कि बांग्लादेश की संसद ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ मॉडल के अनुसार काम करती हैं। यहां संसद में वही उम्मीदवार पहुंचता है, जिसे अपने निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं। 300 सीटें मतदान के जरिए भरी जाती हैं। वहीं 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं, जिन्हें चुनाव जीतकर सरकार बनाने वाली पार्टी और विपक्षी दलों में से चुने जाते हैं।
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सांसदों में से ही चुना जाता है अध्यक्ष
बता दें कि बांग्लादेश की एक सदन वाली संसद का अध्यक्ष सांसदों में से ही चुना जाता है। वह संसद का अध्यक्ष होने के साथ-साथ कार्यवाहक राष्ट्रपति भी होते हैं, जो राष्ट्रपति के न होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाते हैं। विदेशों में भी देश का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। संसद भंग हो जाने के बाद अगले अध्यक्ष का चुनाव होने तक संसद की अध्यक्षता भी करते हैं।
बांग्लादेश की संसद में अध्यक्ष के अलावा एक उपसभापति भी चुने जाते हैं, जिनकी संख्या एक से ज्यादा हो सकती है, जो अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन की अध्यक्षता करते हैं। प्रधानमंत्री संसद में सत्तापक्ष और सरकार के नेता होते हैं। वे मंत्रिमंडल के प्रमुख भी होते हैं। वहीं विपक्ष का नेता सबसे विरोधी पार्टी के नेता को बनाया जाता है। वहीं विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा मिलता है और विपक्ष के लिए वह प्रधानमंत्री के समकक्ष नेता होता है।