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उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड
उत्तराखंड में कब रुकेगा प्रवासियों पर हमला? अब कश्मीर के युवक को पीट-पीटकर किया अधमरा
हिमाचल प्रदेश के सोलन में दिसंबर 2025 में शॉल विक्रेताओं की पिटाई जैसी घटनाओं ने लक्षित उत्पीड़न की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है. पढ़िये जम्मू-कश्मीर से आसिफ सुहाफ की रिपोर्ट.
उत्तराखंड में प्रवासियों पर होने वाले हमलों का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. नॉर्थ ईस्ट से आए एंजेल चमका की हत्या का मामला अभी शांत नहीं हुआ था, कि इस बीच कुछ सामाजिक तत्वों ने कश्मीर से आए एक 18 वर्षीय युवक को पीट-पीठकर अधमरा कर दिया. प्राप्त जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के विकासनगर में कश्मीरी शॉल विक्रेता की कुछ लोगों ने बेरहमी से पिटाई कर दी, जिसके बाद सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लोग अपना आक्रोश जता रहे हैं. इस मामले पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी एक्स पर पोस्ट कर आलोचना की.
प्रवासी विक्रेताओं की सुरक्षा पर चिंता
देशभर में अब उत्तराखंड में बाहर से काम के लिए आए प्रवासी विक्रेताओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई. जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहमी के मुताबिक परिवार के साथ शॉल बेचने निकले इस युवक का बायां हाथ टूट गया, सिर पर लोहे की रॉड से गंभीर चोटें आईं और पूरे शरीर पर चोट के निशान पड़ गए. हमले के बाद उसके सिर से लगातार खून बहता रहा. शुरुआत में उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बाद में उसे देहरादून के डून अस्पताल रेफर किया गया.
पीडीपी नेता ने की हमले की निंदा
राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की और मामले की गहन जांच की मांग उठाई. पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, 'इस 18 साल के कश्मीरी शॉल विक्रेता को उत्तराखंड में लोहे की रॉड से तब तक मारा गया जब तक उसकी हड्डियां टूट नहीं गईं. यह कश्मीरियों के खिलाफ हिंसा की उन कई घटनाओं में से एक है, जहां हमलावर जानते हैं कि उन्हें संस्थागत छूट मिली हुई है. ये अब ‘फ्रिंज’ नहीं रहे. बीजेपी ही ‘फ्रिंज’ को मेनस्ट्रीम बना रही है… माननीय पुष्कर धामी साहब, क्या हम आपसे कार्रवाई की गुजारिश कर सकते हैं?'
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस हमले की निंदा करते हुए एक्स पर ऐसी घटनाओं को 'अस्वीकार्य' बताया. उन्होंने कहा, 'एक तरफ हम कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, वहीं दूसरी तरफ कश्मीर के लोगों को डर के माहौल में जीने पर मजबूर किया जा रहा है… मेरी सरकार जहां भी ज़रूरी होगा, दखल देगी.' अब्दुल्ला ने गृह मंत्रालय से अपील की कि वह अन्य राज्यों को जम्मू-कश्मीर के निवासियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर संवेदनशील बनाए.
गौरतलब है कि यह घटना उन कश्मीरी व्यापारियों की बढ़ती असुरक्षा को दर्शाती है, जो सर्दियों में घाटी में बर्फबारी के दौरान मैदानों वाले राज्यों में आकर पश्मीना शॉल, कालीन और हैंडीक्राफ्ट बेचते हैं. हिमाचल प्रदेश के सोलन में दिसंबर 2025 में शॉल विक्रेताओं की पिटाई जैसी घटनाओं ने लक्षित उत्पीड़न की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है. उत्तराखंड प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से दोषियों की गिरफ्तारी और उन पर सख्त धाराएं लगाने की मांग की जा रही है.
उत्तराखंड में प्रवासियों पर होने वाले हमलों का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. नॉर्थ ईस्ट से आए एंजेल चमका की हत्या का मामला अभी शांत नहीं हुआ था, कि इस बीच कुछ सामाजिक तत्वों ने कश्मीर से आए एक 18 वर्षीय युवक को पीट-पीठकर अधमरा कर दिया. प्राप्त जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के विकासनगर में कश्मीरी शॉल विक्रेता की कुछ लोगों ने बेरहमी से पिटाई कर दी, जिसके बाद सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लोग अपना आक्रोश जता रहे हैं. इस मामले पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी एक्स पर पोस्ट कर आलोचना की.
प्रवासी विक्रेताओं की सुरक्षा पर चिंता
देशभर में अब उत्तराखंड में बाहर से काम के लिए आए प्रवासी विक्रेताओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई. जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहमी के मुताबिक परिवार के साथ शॉल बेचने निकले इस युवक का बायां हाथ टूट गया, सिर पर लोहे की रॉड से गंभीर चोटें आईं और पूरे शरीर पर चोट के निशान पड़ गए. हमले के बाद उसके सिर से लगातार खून बहता रहा. शुरुआत में उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बाद में उसे देहरादून के डून अस्पताल रेफर किया गया.
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पीडीपी नेता ने की हमले की निंदा
राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की और मामले की गहन जांच की मांग उठाई. पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, ‘इस 18 साल के कश्मीरी शॉल विक्रेता को उत्तराखंड में लोहे की रॉड से तब तक मारा गया जब तक उसकी हड्डियां टूट नहीं गईं. यह कश्मीरियों के खिलाफ हिंसा की उन कई घटनाओं में से एक है, जहां हमलावर जानते हैं कि उन्हें संस्थागत छूट मिली हुई है. ये अब ‘फ्रिंज’ नहीं रहे. बीजेपी ही ‘फ्रिंज’ को मेनस्ट्रीम बना रही है… माननीय पुष्कर धामी साहब, क्या हम आपसे कार्रवाई की गुजारिश कर सकते हैं?’
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस हमले की निंदा करते हुए एक्स पर ऐसी घटनाओं को ‘अस्वीकार्य’ बताया. उन्होंने कहा, ‘एक तरफ हम कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, वहीं दूसरी तरफ कश्मीर के लोगों को डर के माहौल में जीने पर मजबूर किया जा रहा है… मेरी सरकार जहां भी ज़रूरी होगा, दखल देगी.’ अब्दुल्ला ने गृह मंत्रालय से अपील की कि वह अन्य राज्यों को जम्मू-कश्मीर के निवासियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर संवेदनशील बनाए.
गौरतलब है कि यह घटना उन कश्मीरी व्यापारियों की बढ़ती असुरक्षा को दर्शाती है, जो सर्दियों में घाटी में बर्फबारी के दौरान मैदानों वाले राज्यों में आकर पश्मीना शॉल, कालीन और हैंडीक्राफ्ट बेचते हैं. हिमाचल प्रदेश के सोलन में दिसंबर 2025 में शॉल विक्रेताओं की पिटाई जैसी घटनाओं ने लक्षित उत्पीड़न की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है. उत्तराखंड प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से दोषियों की गिरफ्तारी और उन पर सख्त धाराएं लगाने की मांग की जा रही है.