दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को प्रशासन की ओर से नोटिस भेजा गया. नोटिस में उनसे छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी मुचलका जमा करने को कहा गया था. हालांकि, पुलिस के अनुसार बाद में यह नोटिस रद्द कर दिया गया.
क्या है पूरा मामला?
अधिकारियों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 4 सितंबर को अक्षत को नोटिस जारी किया था. इसमें उनसे जवाब मांगा गया था कि क्यों न उन्हें अगले छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया जाए.
नोटिस के तहत अक्षत से 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही रकम के दो स्थानीय जमानतदार पेश करने को कहा गया था. मामले की सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी. यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत की गई थी. इससे पहले सहायक पुलिस आयुक्त की अदालत के जरिए धारा 126 और 135 के तहत प्रक्रिया शुरू की गई थी.
पुलिस ने क्या आरोप लगाए?
इकोटेक-1 थाने की पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि अक्षत प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं और फिलहाल इकोटेक-1 इलाके में रहकर GBU में पढ़ाई कर रहे हैं.
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि वह विश्वविद्यालय के दूसरे छात्रों को एक राजनीतिक दल के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे. पुलिस ने उन पर भ्रामक और सरकार विरोधी बातें फैलाने का भी आरोप लगाया. पुलिस के मुताबिक, इन गतिविधियों से विश्वविद्यालय का माहौल तनावपूर्ण होने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी.
छात्र ने आरोपों को नकारा
अक्षत ने पुलिस के आरोपों को गलत बताया है. सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शन में शांतिपूर्वक शामिल हुए थे और उन्होंने किसी तरह की हिंसा नहीं की. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के समय विश्वविद्यालय में पढ़ाई नहीं चल रही थी, क्योंकि संस्थान करीब तीन महीने से बंद था. अक्षत ने दावा किया कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे, तब दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में उन्हें चोट भी लगी थी.
पुलिस ने कहा- नोटिस पहले ही रद्द हो चुका
मामला सामने आने के बाद इकोटेक-1 थाना पुलिस ने मंगलवार को बताया कि नोटिस 4 सितंबर को ही रद्द कर दिया गया था. पुलिस ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को भी इस फैसले की जानकारी दे दी गई है.
इस मामले पर ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (SFI) ने भी प्रतिक्रिया दी है. संगठन ने छात्र के खिलाफ कार्रवाई को ‘दमनकारी’ बताया और उत्तर प्रदेश सरकार व पुलिस की आलोचना की.
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