Himachal-Uttarakhand Traffic Jam: गांधी जयंती के साथ शनिवार और रविवार की छुट्टियों ने पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ ला दी. नैनीताल, शिमला, मनाली और बद्रीनाथ जैसे लोकप्रिय इलाकों में बड़ी संख्या में सैलानियों के पहुंचने से होटल और पार्किंग फुल हो गए, जबकि कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं. सबसे ज्यादा परेशानी नैनीताल में सामने आई, जहां कई पर्यटकों को देर रात तक कमरा नहीं मिला.
नैनीताल में होटल फुल, बस अड्डे पर रुके पर्यटक
लॉन्ग वीकेंड के दौरान नैनीताल में करीब 12 हजार पर्यटकों के पहुंचने से शहर की व्यवस्था पर काफी दबाव बढ़ गया. होटल, होमस्टे और गेस्ट हाउस लगभग पूरी तरह भर गए. रात करीब 1 बजे तक कई पर्यटक सामान लेकर मालरोड और आसपास के इलाकों में ठहरने की जगह तलाशते रहे. कमरा नहीं मिलने पर कुछ लोगों को बस अड्डे पर ही रात बितानी पड़ी.
भवाली, कैंची धाम, गरमपानी और खैरना की ओर जाने वाले रास्तों पर भी कई किलोमीटर तक गाड़ियां फंसी रहीं. हल्द्वानी रोड, भवाली रोड और कालाढूंगी रोड के अलावा मालरोड, जू रोड और शेरवानी मार्ग पर भी ट्रैफिक स्लो रहा. नैनी झील, चिड़ियाघर, स्नो व्यू और हिमालय दर्शन जैसे अहम टूरिस्ट डेस्टिनेशंस पर भी भारी भीड़ रही.
शिमला में 3 KM का सफर एक घंटे में
शिमला में हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली से बड़ी तादाद में पर्यटक पहुंचे. तारादेवी से शिमला तक कई हिस्सों में वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं. करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय करने में कई यात्रियों को एक घंटे तक लग गया. प्रमुख पार्किंग स्थलों के भर जाने से वाहन खड़े करने में भी दिक्कत हुई. डीएसपी ट्रैफिक चंद्र शेखर के अनुसार, पिछले 24 घंटे में शिमला में 17 हजार से ज्यादा वाहन पहुंचे, जिनमें 7 हजार से ज्यादा पर्यटक वाहन थे. ट्रैफिक संभालने के लिए ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई.
बद्रीनाथ मार्ग पर 9 किलोमीटर तक जाम
बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पर जोशीमठ से विष्णुप्रयाग के बीच करीब 7 से 9 किलोमीटर तक गाड़ियों की कतार लगी रही. बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोग भी जाम में फंसे रहे. जोशीमठ से मारवाड़ी तक का सामान्य आधे घंटे का सफर पूरा करने में 2 से 3 घंटे लग रहे थे.
कालका-शिमला हाईवे और मनाली में भी परेशानी
कालका-शिमला नेशनल हाईवे-5 पर भी गाड़ियों की रफ्तार बेहद धीमी रही. कई जगहों पर घंटों तक गाड़ियां रेंगती नजर आईं. मनाली में भी पर्यटकों की बढ़ती तादाद से प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक दबाव बढ़ गया. लॉन्ग वीकेंड ने पर्यटन कारोबार को जरूर बढ़ावा दिया, लेकिन होटल क्षमता, पार्किंग और रोड सेफ्टी पर बढ़ता दबाव पहाड़ी शहरों के सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती को भी बयां कर रहा है.