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उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

इंडियन रेलवे को बड़ा झटका, कंज्यूमर कोर्ट ने लगाया 9 लाख जुर्माना, पढ़ें UP में क्या हुआ था 7 साल पहले?

Consumer Court News: भारतीय रेलवे पर 9 लाख रुपये का जुर्माना लगा है. एक छात्रा ने इंसाफ की गुहार लगाते हुए कंज्यूमर कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर आज 27 जनवरी को फैसला आया है. रेलवे विभाग के कारण छात्रा नीट का एग्जाम देने से चूक गई थी.

Author Edited By : khushbu.goyal
Updated: Jan 27, 2026 15:10
Indian Railways
देशभर में लाखों लोग रोजाना ट्रेनों में सफर करते हैं.

Consumer Court vs Indian Railways: उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में कंज्यूमर कोर्ट ने 7 साल बाद एक छात्रा से जुड़े केस में फैसला सुनाया और भारतीय रेलवे पर 9 लाख 10 हजार रुपये का भारी भरकम जुर्माना लगाया. मामला 7 साल पहले का है, जब पीड़ित छात्र ट्रेन लेट होने के कारण नीट का एग्जाम देने से चूक गई थी और उसकी सालों की तैयारी के साथ-साथ मेहनत पर भी पानी फिर गया था. पीड़िता ने रेल विभाग की शिकायत करते हुए इंसाफ की गुहार लगाई थी, जो आज मिला.

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ट्रेन लेट होने से छूटा था एग्जाम

बता दें कि रेलवे के खिलाफ याचिका कोतवाली थाना क्षेत्र के पिकौरा बक्स मोहल्ले की रहने वाली छात्रा समृद्धि ने दायर की थी. क्योंकि वह साल 2018 में ट्रेन लेट होने की वजह से नीट का एग्जाम नहीं दे पाई थी. उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने रेलवे पर 9 लाख 10 हजार का जुर्माना ठोका. साथ ही निर्देश दिया कि अगर रेलवे ने जुर्माना भरने में देरी की तो जितने महीने की देरी होगी, उतने महीने का ब्यान 12 प्रतिशत के हिसाब से देना होगा.

लखनऊ जाना था एग्जाम देने के लिए

समृद्धि ने याचिका में बताया था कि साल 2018 में उसने नीट का फॉर्म भरा था और एग्जाम के लिए लखनऊ का जयनारायण PG कॉलेज अलॉट हुअ था. बस में टाइम लगता, इसलिए समय बचाने के लिए उसने बस्ती से इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट खरीदा और रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई. एग्जाम 12 बजे होना था और सेंटर पर पहुंचने का समय 11 बजे था, लेकिन ट्रेन लेट होने की वजह से वह सेंटर पर ढाई घंटा लेट पहुंची और वह एग्जाम में नहीं बैठ पाई. इस घटनाक्रम ने उसे काफी आहत किया था और वह काफी रोई भी थी.

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रेलवे ने नोटिस का जवाब नहीं दिया

समृद्धि के वकील प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि समृद्धि ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की और जज ने सुनवाई करते हुए केंद्रीय रेल मंत्रालय, महाप्रबंधक रेलवे और स्टेशन अधीक्षक को नोटिस भेजा, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला, जिसके चलते 11 सितंबर 2018 को अदालत में मुकदमा दायर कर लिया और मामले की सुनवाई की. आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और रेलवे ने ट्रेन लेट होने की गलती स्वीकार की, लेकिन ट्रेन लेट क्यों हुई, इस बारे में नहीं बताया. इसलिए कंज्यूमर कोर्ट ने रेलवे पर जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया.

First published on: Jan 27, 2026 02:48 PM

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