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राजस्थान बनाम हरियाणा फंड विवाद: बीजेपी में सरकार–संगठन की दरार, कांग्रेस को मिला हमला करने का मौका

राजस्थान बनाम हरियाणा MPLAD फंड विवाद में बीजेपी के सरकार और संगठन के अलग-अलग सुर सामने आए हैं. कांग्रेस सांसदों के फंड उपयोग को लेकर सियासत तेज, बीजेपी की अंदरूनी दरार उजागर.

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Written By: kj.srivatsan Updated: Jan 6, 2026 17:46

राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक बार फिर सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी खुलकर सामने आ गई है. विवाद की जड़ है सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLAD), जिसे लेकर तीन कांग्रेस सांसदों द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र या राजस्थान में विकास कार्य कराने की बजाय पड़ोसी राज्य हरियाणा में कांग्रेस के एक राष्ट्रीय नेता के बेटे की विधानसभा सीट पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च करने की अनुशंसा किए जाने का मामला सामने आया है.

इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. बीजेपी ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस पर सवाल दागे हैं कि जब राजस्थान में ही कई इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो फिर दूसरे राज्य में पैसा भेजने की जरूरत क्यों पड़ी.

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हालांकि, इस पूरे विवाद में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का बयान पार्टी के लिए असहज करने वाला साबित हुआ. राठौड़ ने कहा कि संसद के नियमों के तहत सांसद अपनी विकास निधि का 10 प्रतिशत हिस्सा देश के किसी भी हिस्से में खर्च करने की अनुशंसा कर सकते हैं और इसमें कोई अनियमितता नहीं है. उनका यह बयान बीजेपी के आक्रामक रुख से अलग नजर आया.

वहीं दूसरी ओर, राजस्थान सरकार में शामिल बीजेपी के मंत्रियों ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. मंत्रियों का कहना है कि कांग्रेस सांसदों के अपने क्षेत्र की जनता आज भी अधूरे विकास कार्यों का इंतजार कर रही है और ऐसे में दूसरे राज्य में पैसा खर्च करना राजस्थान की जनता के साथ छल है. उनका तर्क है कि जनप्रतिनिधि का पहला धर्म अपने क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देना होता है.

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बीजेपी के भीतर विरोधाभासी बयानों के बीच कांग्रेस ने भी पलटवार तेज कर दिया है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि फंड का वितरण पूरी तरह नियमों के तहत किया गया है और सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि बीजेपी के सांसद भी दूसरे राज्यों में निधि खर्च करते रहे हैं. जूली ने सवाल उठाया कि अगर बीजेपी को इस व्यवस्था से आपत्ति है तो उसकी सरकार नियमों में बदलाव क्यों नहीं करती.

नियमों के मुताबिक, सांसद पहले अपनी विकास निधि का 5 प्रतिशत हिस्सा ही दूसरे क्षेत्र में खर्च कर सकते थे, जिसे अब बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. लेकिन राजनीतिक बहस अब नियमों से आगे बढ़कर नैतिकता और प्राथमिकताओं पर टिक गई है.

सवाल साफ है जब राजस्थान में सड़क, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई काम अधूरे पड़े हैं, तो क्या दूसरे राज्यों में फंड भेजना सही ठहराया जा सकता है? इसी सवाल ने राजस्थान की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है.

First published on: Jan 06, 2026 05:46 PM

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