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राजस्थान के लाखों छात्रों को बड़ी राहत, अब साल में दो बार होगी बोर्ड परीक्षा; मिलेगा “बेस्ट ऑफ टू” का सुनहरा मौका

राजस्थान के बोर्ड छात्रों के लिए शुक्रवार को एक बड़ा एलान सामने आया है. राज्य के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) एक नहीं, बल्कि साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करेगा. यह फैसला छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करने और उन्हें अपने प्रदर्शन को बेहतर करने का मौका देने के लिए लिया गया है. पढ़ें राजस्थान से के जे श्रीवत्सन की रिपोर्ट.

Author Written By: News24 हिंदी Updated: Nov 8, 2025 20:00

राजस्थान के बोर्ड छात्रों के लिए शुक्रवार को एक बड़ा एलान सामने आया है. राज्य के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) एक नहीं, बल्कि साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करेगा. यह फैसला छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करने और उन्हें अपने प्रदर्शन को बेहतर करने का मौका देने के लिए लिया गया है.

शिक्षा मंत्री दिलावर ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है और इससे छात्रों का अवसर बढ़ेगा, तनाव घटेगा और परिणाम अधिक पारदर्शी होंगे.

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क्या होगा नया बदलाव?

साल में दो बोर्ड परीक्षाएं होगी. पहली परीक्षा फरवरी–मार्च में और दूसरी मई–जून में होगी, जिसे द्वितीय अवसर परीक्षा कहा जाएगा. पहली परीक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगी, यानी कि इसमें बैठना हर विद्यार्थी के लिए जरूरी होगा.

दूसरी परीक्षा में केवल पहली परीक्षा के अंकों के प्रदर्शन सुधार का मौका होगा. जिसके तहज छात्र अधिकतम तीन विषयों में दूसरी बार होने वाली परीक्षा देकर अंक सुधार कर सकेंगे.

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इससे पूरक और पहली परीक्षा में फेल होने वाले छात्र भी लाभान्वित होंगे क्योकि जिन छात्रों को पूरक मिला है, वे भी तीन विषयों तक में सुधार कर सकेंगे. दूसरी बार फेल होने पर वे अगले साल फरवरी की मुख्य परीक्षा में शामिल होंगे.

शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि “बेस्ट ऑफ टू” सिस्टम — छात्रों की सबसे बड़ी जीत है. क्योंकि दोनों परीक्षाओं में जो सबसे अच्छे अंक होंगे, वही अंतिम परिणाम में जोड़े जाएंगे. यानी एक खराब दिन या एक खराब पेपर पूरे साल की मेहनत पर भारी नहीं पड़ेगा.

इसके साथ ही पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति केवल उसी वक़्त मिलेगी जब वह सक्षम अधिकारी के मेडिकल सर्टिफिकेट या जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) के प्रमाण पत्र लाकर देगा.

उधर, जानकारों की माने तो यह बदलाव राजस्थान को उन राज्यों की कतार में खड़ा कर देगा, जहां बोर्ड परीक्षा को एक उच्च दबाव वाली घटना नहीं, बल्कि निरंतर मूल्यांकन का अवसर माना जाता है. इससे छात्र न केवल बेहतर परिणाम ला सकेंगे बल्कि तनाव मुक्त होकर पढ़ाई भी कर पाएंगे.

First published on: Nov 08, 2025 06:59 PM

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