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राजस्थान

5 हजार में डिग्री, 100 से ज्यादा कोर्स, फर्जी नेटवर्क चलाने वाली प्राइवेट यूनिवर्सिटी का डायरेक्टर गिरफ्तार

fake Digree racket busted Chennai: चेन्नई से जयपुर तक फैले फर्जी ‘डिग्री बाज़ार’ का पर्दाफाश करते हुए जयपुर एसओजी ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर को चेन्नई से गिरफ्तार है. जांच में सामने आया कि आरोपी सालों से बिना UGC मान्यता 100 से ज़्यादा प्रोफेशनल कोर्स चला रहा था. SOG के मुताबिक राजस्थान में ही 2,000 से ज़्यादा इंस्टीट्यूट्स इस फर्जी यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे.

Author Written By: kj.srivatsan Updated: Jan 8, 2026 21:41
Arun Mayson arrested fake Degree racket

fake Degree racket busted Chennai: राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने का एक खतरनाक शॉर्टकट…जिसने सिस्टम की जड़ों को ही हिला दिया है. SOG ने उस फर्ज़ी डिग्री नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके ज़रिए फायर टेक्नीशियन, लाइब्रेरियन, पटवारी यहां तक कि भारतीय नौसेना की तकनीकी भर्तियों तक में नकली डिग्रियों के दम पर नौकरी पाई जा रही थी.इस पूरे खेल का कंट्रोल रूम चेन्नई में था, जहां बिना UGC मान्यता सरकारी नौकरी की “चाबी” खुलेआम बेची जा रही थी. चौंकाने वाली बात ये कि इस फर्ज़ी डिग्री बाज़ार से अब तक 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की जा चुकी है. देखिए… फर्ज़ी डिग्री के इस फुल-प्रूफ नेटवर्क की पूरी कहानी.

व्हाट्सएप पर चलता था पूरा खेल

राजस्थान पुलिस की गिरफ्त में दिख रहा ये शख्स मायसन उर्फ अरुण मायसन है… जिसे SOG ने चेन्नई से गिरफ्तार किया है. आरोपी खुद को भारत सेवक समाज (BSS) यूनिवर्सिटी का डायरेक्टर बताता था. SOG को इनपुट मिला था कि हाल ही में हुई नौसेना फायरमैन भर्ती परीक्षा में इसके संस्थान से जारी की गई फर्ज़ी डिग्रियों के आधार पर कई अभ्यर्थी परीक्षा में बैठे हैं.जानकारी मिलते ही SOG की दो टीमों ने चेन्नई में छापा मारा. जांच में सामने आया कि आरोपी सालों से बिना UGC मान्यता 100 से ज़्यादा प्रोफेशनल कोर्स चला रहा था. फायर टेक्नीशियन, लाइब्रेरियन, डिप्लोमा कोर्स हर डिग्री की कीमत तय थी 15 हज़ार से 50 हज़ार रुपये. व्हाट्सएप पर पूरा खेल चलता था, ऑर्डर लो, सर्टिफिकेट तैयार करो, और कूरियर से राजस्थान भेज दो.

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भारत सेवक समाज में 1952 से दी जा रहीं डिग्रियां

भारत सेवक समाज की शुरुआत साल 1902 में हुई थी…और 1952 से यहां डिग्रियां दी जा रही थीं. लेकिन वक्त के साथ यह संस्था शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी दिलाने का कारखाना बन गई. पटवारी भर्ती परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी के मोबाइल से इस यूनिवर्सिटी के फर्ज़ी सर्टिफिकेट मिले. यहीं से SOG को पहला सुराग मिला और पूरा डिग्री रैकेट परत-दर-परत खुलता चला गया. अब डायरेक्टर की गिरफ्तारी के बाद बैकडेट में डिग्री लेकर नौकरी पाने वाले हज़ारों सरकारी कर्मचारी SOG के रडार पर हैं. सिर्फ जयपुर में ही 7,000 से ज़्यादा इंस्टीट्यूट्स की भूमिका की जांच चल रही है.

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जांच में ये भी सामने आया कि भारत सेवक समाज ने अभ्यर्थियों से सिर्फ 12वीं की मार्कशीट और आधार कार्ड लेकर 2 से 3 दिन में फायर टेक्नीशियन कोर्स की मार्कशीट और प्रमाण पत्र जारी कर दिए थे— वो भी जुलाई 2025 में. हैरानी की बात ये कि इस संस्था के पास ना कोई ट्रेनिंग सेंटर था,ना कोई इंफ्रास्ट्रक्चर—सिर्फ एक ऑफिस के दम पर देशभर में हज़ारों फर्ज़ी डिग्रियां बांटी गईं.

फर्जीवाड़े के चलते हज़ारों डिग्रियां जांच के दायरे में

भारत सेवक समाज खुद को योजना आयोग, भारत सरकार से अधिकृत बताकर स्किल डेवलपमेंट कोर्स चलाने का दावा करती रही. जबकि हकीकत ये है कि योजना आयोग ने इस संस्था को कभी कोई मान्यता नहीं दी. प्रारंभिक जांच में यह भी साफ हुआ की यह यूनिवर्सिटी बिना किसी सरकारी मान्यता और रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रही थी. यहां 100 से अधिक प्रोफेशनल कोर्स कागज़ों पर चलाए जा रहे थे. अब इस फर्जीवाड़े के चलते हज़ारों डिग्रियां जांच के दायरे में हैं. फर्ज़ी डिग्री के सहारे सरकारी नौकरी पाने वालों की अब खैर नहीं. SOG की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में राजस्थान की कई बड़ी भर्तियों को कटघरे में खड़ा कर सकती है.फिलहाल, भारत सेवक समाज के चेयरमैन बी.एस. बालचंद्रन के खिलाफ कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं. वहीं, मामले से जुड़े अन्य आरोपियों पर भी SOG की कार्रवाई जारी है.

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First published on: Jan 08, 2026 09:40 PM

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