महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों और बीएमसी (BMC) में मिली करारी हार के बाद शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी और शिंदे गुट पर जोरदार हमला बोला. नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने हार के कारणों पर खुलकर चर्चा की और महायुति पर निशाना साधा. ठाकरे ने जोर देकर कहा कि पार्टी की सफलता किसी एक चेहरे की नहीं, बल्कि उन जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है जिन्होंने विपरीत हालातों में भी साथ नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा, 'मैं तो बस चेहरा हूं, असली वास्तुकार गली-मोहल्लों में खड़े शिवसैनिक हैं.'
'शक्ति, पैसा और धमकी' से तोड़फोड़
उद्धव ठाकरे ने स्वीकार किया कि यह संघर्ष बेहद मुश्किल परिस्थितियों में लड़ा गया, जब सत्ता, संसाधन व संस्थागत ताकत उनके खिलाफ थी. बीजेपी पर सीधा आरोप लगाते हुए बोले कि विरोधी सोचते हैं कागज और चुनाव चिन्ह छीनकर शिवसेना को मिटा देंगे, लेकिन 'माटी से जुड़ी शिवसेना' को कोई समाप्त नहीं कर सकता. उन्होंने सत्ता पक्ष पर 'शक्ति, पैसा और धमकी' से तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया. उन्होंने एकनाथ शिंदे को लेकर ईशारों में कहा कि जो छोड़कर गए, वे सत्ता के साथ भले हों, लेकिन असली शिवसैनिकों की निष्ठा अटल है, इसे खरीदा नहीं जा सकता.
यह भी पढ़ें: BMC में किंगमेकर बना शिंदे गुट, ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के डर से पार्षदों को 5 स्टार होटल में किया गया शिफ्ट
'साम-दाम-दंड-भेद' से चुनाव लड़ा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने 29 महानगरपालिका चुनाव परिणामों का जिक्र किया. कहा कि तीन जगह सफलता मिली, जहां नहीं पहुंच सके वहां के शिवसैनिकों से खेद है. सत्ता पक्ष ने 'साम-दाम-दंड-भेद' से चुनाव लड़ा, लालच दिया, धमकाया, पैसे के साथ कुकर-मिक्सर बांटे. फिर भी हमारे साथ खड़े लोगों को धन्यवाद. उद्धव ने आगे कहा कि दादर सभा में भीड़ उमड़ी, विरोधियों की खाली कुर्सियां, फिर उनके ज्यादा वोट कैसे? यह पच नहीं रहा. बीजेपी ने कागजों पर शिवसेना खत्म की, लेकिन जमीन पर नहीं. क्योंकि वे कागजी पार्टी हैं, इसलिए दूसरों को तोड़ते हैं.
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों और बीएमसी (BMC) में मिली करारी हार के बाद शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी और शिंदे गुट पर जोरदार हमला बोला. नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने हार के कारणों पर खुलकर चर्चा की और महायुति पर निशाना साधा. ठाकरे ने जोर देकर कहा कि पार्टी की सफलता किसी एक चेहरे की नहीं, बल्कि उन जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है जिन्होंने विपरीत हालातों में भी साथ नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा, ‘मैं तो बस चेहरा हूं, असली वास्तुकार गली-मोहल्लों में खड़े शिवसैनिक हैं.’
‘शक्ति, पैसा और धमकी’ से तोड़फोड़
उद्धव ठाकरे ने स्वीकार किया कि यह संघर्ष बेहद मुश्किल परिस्थितियों में लड़ा गया, जब सत्ता, संसाधन व संस्थागत ताकत उनके खिलाफ थी. बीजेपी पर सीधा आरोप लगाते हुए बोले कि विरोधी सोचते हैं कागज और चुनाव चिन्ह छीनकर शिवसेना को मिटा देंगे, लेकिन ‘माटी से जुड़ी शिवसेना’ को कोई समाप्त नहीं कर सकता. उन्होंने सत्ता पक्ष पर ‘शक्ति, पैसा और धमकी’ से तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया. उन्होंने एकनाथ शिंदे को लेकर ईशारों में कहा कि जो छोड़कर गए, वे सत्ता के साथ भले हों, लेकिन असली शिवसैनिकों की निष्ठा अटल है, इसे खरीदा नहीं जा सकता.
यह भी पढ़ें: BMC में किंगमेकर बना शिंदे गुट, ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के डर से पार्षदों को 5 स्टार होटल में किया गया शिफ्ट
‘साम-दाम-दंड-भेद’ से चुनाव लड़ा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने 29 महानगरपालिका चुनाव परिणामों का जिक्र किया. कहा कि तीन जगह सफलता मिली, जहां नहीं पहुंच सके वहां के शिवसैनिकों से खेद है. सत्ता पक्ष ने ‘साम-दाम-दंड-भेद’ से चुनाव लड़ा, लालच दिया, धमकाया, पैसे के साथ कुकर-मिक्सर बांटे. फिर भी हमारे साथ खड़े लोगों को धन्यवाद. उद्धव ने आगे कहा कि दादर सभा में भीड़ उमड़ी, विरोधियों की खाली कुर्सियां, फिर उनके ज्यादा वोट कैसे? यह पच नहीं रहा. बीजेपी ने कागजों पर शिवसेना खत्म की, लेकिन जमीन पर नहीं. क्योंकि वे कागजी पार्टी हैं, इसलिए दूसरों को तोड़ते हैं.