बुधवार तड़के मुंबई के घाटकोपर इलाके में भारी बारिश के बाद भूस्खलन हुआ जिसमें तीन बच्चों सहित सात लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए. इसकी जानकारी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारियों ने दी.
अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह 3 बजकर 48 मिनट पर चिराग नगर के अशोक नगर स्थित गौसिया चॉल में हुई है. उन्होंने बताया कि पहाड़ी का एक हिस्सा एवं मलबा दो-तीन घरों पर गिर गया, जिससे नुकसान हुआ है. उन्होंने जानकारी दी कि घाटकोपर स्थित बीएमसी द्वारा संचालित राजावाडी अस्पताल में सात लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
मरने वालों की पहचान मोहम्मद समीर अंसारी (14), साहिल हुसैन अब्दुल काजी (19), अबान आरिफ शेख (दो), मन्नत आरिफ शेख (चार) और मरजीना आरिफ शेख (27) और विकेत रमेश यादव (27) के रूप में हुई. अभी एक अन्य की पहचान नहीं हो पाई है. वहीं घायलों में फराना दिलबर खान (28), दिलबर अमानुल्लाह खान (38) और शमीम मुस्लिम खान (26) को राजावाडी अस्पताल में भर्ती कराया गया, अभी उनकी हालत सही बताई गई है. बाकी घायल लोगों सोहेल अंसारी (18), मोहम्मद अंसारी (14), नईमुद्दीन इकबाल खान (28) और साजिद अंसारी (16) को कुर्ला में बीएमसी द्वारा संचालित भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनकी भी हालत स्थिर बताई गई है.
दमकल विभाग, पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बाल (एनडीआरएफ), एंबुलेंस सेवा और बीएमसी के वार्ड कर्मचारियों के दल वहाँ पर मौजूद हैं. खोज एवं बचाव अभियान जारी है. मुंबई की महापौर रितु तावड़े घटना स्थल पर पहुंची और वहाँ का जायजा लिया.
महापौर ने हर एक मरने वाले के करीबी को चार-चार लाख रुपये की तत्काल सहायता और हर घायल व्यक्ति को इलाज के लिए 50,000 रुपये देने का एलान किया.
बीएमसी ने बताया कि वह लगातार निवासियों को सावधान करती रहती है और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों को खाली करने की सलाह देती रहती है. नगर निकाय ने बताया कि उसने घाटकोपर के अशोक नगर के टेकड़ी नंबर-तीन के निवासियों को भूस्खलन के खतरे के बारे में चेतावनी दी थी और जागरुकता अभियान भी चलाया था.
बीएमसी के एक बड़े अधिकारी ने मीडिया को बताया कि भूस्खलन से कई मकान उसकी चपेट में आ गए. उन्होंने बताया कि घटनास्थल तक का रास्ता इतना छोटा है कि एक बार में केवल एक ही व्यक्ति जा सकता है, जो चुनौतीपूर्ण है. वहाँ चलने तक की जगह नहीं है, वहाँ मशीन नहीं जा सकती. जिसके कारण बचाव कार्य के लिए मुश्किल हो रही है. उन्होंने कहा, ‘तीन से साढ़े तीन फुट की पतली गलियों के कारण, मलबे को रेकर (एक तरह की क्रेन) से हटाया जा रहा है और फिर बाल्टी की मदद से हाथों से बाहर निकाला जा रहा है.
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