अक्षय कुमार की चर्चित फिल्म ‘स्पेशल 26’ का वह रोमांचक और सनसनीखेज दृश्य तो आपको याद ही होगा, जहां फर्जी अधिकारी बनकर आयकर विभाग का फर्जी छापा मारा जाता है. ठीक उसी तर्ज पर एक चौंकाने वाली वारदात मुंबई के व्यस्त अंधेरी इलाके में हकीकत का रूप लेती दिखी. खुद को आयकर विभाग और क्राइम ब्रांच का बड़ा अधिकारी बताकर एक कारोबारी के दफ्तर में जबरन घुसने और 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने वाली एक शातिर गैंग का अंधेरी पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कुल 10 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है. इस पूरे फर्जीवाड़े का सबसे सनसनीखेज पहलू यह सामने आया कि इस आपराधिक साजिश में आयकर विभाग के दो असली कार्यरत कर्मचारी भी बराबर के साझेदार निकले.
बदले की भावना से लिखी गई थी पटकथा
इस फिल्मी साजिश के पीछे की पटकथा किसी गहरी रंजिश और बदले की भावना से लिखी गई थी. पुलिस की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार शिकायतकर्ता व्यवसायी राजकुमार कंडासमी का पूर्व ड्राइवर संतोष उदय खोपटकर है. संतोष और कारोबारी राजकुमार के बीच कुछ समय पहले विवाद हुआ था, जिसके बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था. संतोष का आरोप था कि उसकी करीब छह महीने की पगार रोकी गई थी. इसी खुन्नस का बदला लेने के लिए उसने कारोबारी के दफ्तर, उसके काम करने के तरीके, कर्मचारियों की आवाजाही और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी तमाम अंदरूनी जानकारियां जुटाकर अपने शातिर साथियों के साथ मिलकर फर्जी छापे का यह खतरनाक जाल बुना.
आरोपियों ने रचा समानांतर कार्रवाई का नाटक
वारदात वाले दिन आरोपियों ने पूरी योजना के तहत समानांतर कार्रवाई का नाटक रचा. फर्जी सरकारी पहचान पत्र दिखाते हुए आरोपी दफ्तर के भीतर जबरन दाखिल हुए और खुद को आयकर तथा क्राइम ब्रांच का आला अफसर घोषित कर दिया. खौफ का माहौल कायम करने के लिए उन्होंने तुरंत दफ्तर में मौजूद लगभग 10 कर्मचारियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया. इसके बाद कारोबारी राजकुमार कंडासमी और उनकी पत्नी को बंधक जैसी स्थिति में रखकर भारी जुर्माना और कड़ी कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई. जब दंपत्ति पूरी तरह दहशत में आ गया, तो मामले को तुरंत रफा-दफा करने के एवज में आरोपियों ने सीधे 1 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग रख दी.
पीड़ित कारोबारी की शिकायत मिलते ही एक्शन में आई अंधेरी पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना तंत्र के आधार पर जाल बिछाकर मुख्य साजिशकर्ता संतोष खोपटकर समेत और उसके साथियों समेत कुल 10 लोगो को गिरफ्तार गया. हालांकि, मामले में असली मोड़ तब आया जब जांच के दौरान आयकर विभाग में कार्यरत दो असली अधिकारियों, आयकर निरीक्षक सुरेश महावीरप्रसाद मिश्रा और कर सहायक सुनिल मनोहर गोरे की सीधी संलिप्तता के पक्के सबूत मिले. ये दोनों कर्मचारी भी फर्जी छापे के समय दफ्तर में मौजूद रहकर कारोबारी पर दबाव बना रहे थे, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
मुंबई पुलिस के डीसीपी दत्ता नलावडे के मुताबिक, पुलिस अब सभी आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर यह पता लगा रही है कि फर्जी पहचान पत्र कहां तैयार कराए गए थे और क्या इस गिरोह ने शहर के अन्य व्यापारियों को भी इसी अंदाज में अपना शिकार बनाया है.
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