हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Gyanesh KumarsirBigg Boss 20

Bhiwandi Building Collapse: जान का जोखिम फिर भी जर्जर इमारतों को छोड़ने से क्यों कतराते हैं लोग?

महाराष्ट्र के भिवंडी में हुए बिल्डिंग हादसे के बाद एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. मुंबई में बीएमसी द्वारा जर्जर घोषित किए जाने के बाद भी हजारों परिवार अपनी जान जोखिम में डालकर इन्हीं मकानों में रहने को मजबूर हैं. जानिए इसके पीछे की असली वजह.

विज्ञापन

महाराष्ट्र के भिवंडी में बारिश के बीच चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरने से अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है. मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में हर साल मानसून की शुरुआत के साथ ही जर्जर इमारतों के गिरने का सिलसिला शुरू हो जाता है. हर हादसे के बाद एक ही सवाल उठता है कि जब प्रशासन इमारत को खतरनाक घोषित कर चुका होता है, तो लोग उसे खाली क्यों नहीं करते?

30 जुलाई, 2026 की रात जिस नारपोली, भिवंडी तालुका में कोहिनूर बिल्डिंग में हादसा हुआ, उसे भिवंडी-निजामपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया था. हालांकि, हादसा तब हुआ जब इसकी मरम्मत का काम अभी भी चल रहा था. इस बिल्डिंग में कुल 48 कमरे थे, जैसे ही रात 8.00 से 9.00 बजे के बीच बिल्डिंग से “कर…कर…कट…कट” की आवाज़ आई, कुछ परिवारों को तुरंत लोकल लोगों की मदद से सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया. हालांकि, जब कुछ लोग ज़िंदा थे और बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी बिल्डिंग का ‘B विंग’ वाला हिस्सा अचानक गिर गया.

महाराष्ट्र के भिवंडी में बड़ा हादसा, चार मंजिला इमारत गिरी; अब तक 6 लोगों की मौत

विज्ञापन

बीएमसी की C-1 सूची और जमीनी हकीकत

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) हर साल बारिश से पहले मुंबई की पुरानी और जर्जर इमारतों का सर्वे करता है. सबसे ज्यादा खतरनाक और रहने के लिए अयोग्य इमारतों को C-1 कैटेगरी में रखा जाता है. साल 2026 के मानसून के लिए बीएमसी ने मुंबई में 337 इमारतों को C-1 श्रेणी में चिह्नित किया है. इन्हें तुरंत खाली कराने का नियम है, लेकिन नोटिस मिलने के बाद भी लोग मकान छोड़ने को तैयार नहीं होते.

आखिर जोखिमभरे मकानों में क्यों रहते हैं लोग?

  • महंगा किराया: मुंबई में नया मकान किराए पर लेना बेहद महंगा है. पुरानी इमारतों में कम किराए या ‘पगड़ी सिस्टम’ पर रह रहे परिवारों के लिए अचानक नया घर तलाशना आर्थिक रूप से नामुमकिन जैसा होता है.
  • रीडेवलपमेंट में देरी: बिल्डरों और निवासियों के बीच विवाद, अदालती मामले और कागजी कार्रवाई के कारण पुनर्विकास परियोजनाएं सालों तक लटकी रहती हैं. लोगों को डर रहता है कि एक बार घर छोड़ दिया तो नया मकान कब मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है.
  • हक खोने का डर: दशकों से रह रहे परिवारों को लगता है कि अगर वे इमारत खाली कर देंगे, तो उन्हें पुनर्विकास के बाद अपना हक या नया फ्लैट मिलने में कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है.
  • रोजी-रोटी और बच्चों की पढ़ाई: पुरानी इमारतें शहर के प्रमुख इलाकों में स्थित हैं, जहां से स्कूल, अस्पताल और काम की जगह पास होती है. कहीं दूर शिफ्ट होने से उनका पूरा दैनिक जीवन प्रभावित हो जाता है.

संसद और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की चिंता

देशभर में जर्जर इमारतों के गिरने की घटनाओं पर संसद में भी चर्चा हो चुकी है. केंद्र सरकार के मुताबिक, इमारतों की सुरक्षा और एनओसी का जिम्मा राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों का होता है. साल 2025 में विरार में हुए दर्दनाक इमारत हादसे में 17 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लिया था.
सच्चाई तो यह है कि केवल खाली करने का नोटिस थमा देने से समस्या हल नहीं होगी. जब तक बेघर होने वाले परिवारों को सुरक्षित अस्थायी आवास, पारदर्शी पुनर्वास नीति और तेजी से रीडेवलपमेंट का भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक लोग मजबूरी में इन्हीं खतरनाक मकानों में रहने को मजबूर रहेंगे.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola