कौन हैं और क्या चाहते Manoj Jarange, जिसके आरक्षण आंदोलन के आगे झुकी महाराष्ट्र की शिंदे सरकार

Maratha Reservation Protest Manoj Jarange: मनोज जरांगे, मराठा आरक्षण आंदोलन की जान, जिनकी जिद के आगे शिंदे सरकार को झुकना ही पड़ा। जानिए इनके बारे में, जिनकी एक आवाज पर लाखों लोग सड़क पर उतर जाएंगे।

Manoj Jarange Maratha Reservation Protest Leader

मनोज जरांगे

Maratha Reservation Protest Manoj Jarange Profile: 12वीं पास, दुबला-पतला इंसान, पढ़ाई छोड़कर होटल में नौकरी करनी पड़ी। मां-बाप, 3 भाई, पत्नी और 4 बच्चे, परिवार की आर्थिक स्थिति भी कुछ खास नहीं, लेकिन अचानक होटल की नौकरी छोड़ आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन करने के लिए 2 एकड़ जमीन भी बेच दी।

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पिछले करीब 10 सालों से हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। न सर्दी-गर्मी देखी, न सेहत का ख्याल, भूख हड़ताल तक की। आंदोलन के कारण परिवार को काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं, लेकिन साफ दिल से की गई मेहनत का फल तो मिलता ही है। यही हुआ, आंदोलन के आगे महाराष्ट्र सरकार को झुकना पड़ा और मनोज जरांगे की मांगें CM एकनाथ शिंदे ने मान लीं।

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आखिर कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल?

मनोज जरांगे पाटिल महाराष्ट्र के बीड जिले के गांव मोतारी में जन्मे थे। 2010 में 12वीं की, लेकिन पढ़ाई छोड़ कर होटल में नौकरी करनी पड़ी। अचानक नौकरी छोड़ मराठा आंदोलन से जुड़ गए। 2014 से मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े हैं। आंदालन में सहयोग करने के लिए, मराठा समुदाय के सशक्तिकरण के लिए शिवबा संगठन बनाया।

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कांग्रेस जॉइन की थी, लेकिन मांगें पूरी होती नहीं दिखी तो पार्टी छोड़ दी। मराठा आंदोलन इतना महत्वपूर्ण है कि मनोज जरांगे ने अपने परिवार को भी मुश्किलें सहते हुए आंदोलन में सहयोग करने को कहा। मनोज मराठाओं के हक के लिए जान तक दे सकता है, लेकिन मराठा आरक्षण लेकर रहेगा।

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बैकफुट पर आई शिंदे सरकार पहुंची हाईकोर्ट

अपनी राह पर आगे बढ़ते हुए मनोज ने 26 जनवरी को सड़कों पर उतरने का ऐलान किया तो महाराष्ट्र सरकार हिल गई और ढाई लाख मराठाओं के आजाद मैदान पहुंचने से पहले ही मनोज जरांगे की मांगें मान लीं।

मनोज जरांगे ने आरक्षण के लिए आंदोलन की ऐसी अलख जगाई कि सड़कों पर मराठाओं की आंधी देख मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जरांगे से आंदोलन खत्म करने की अपील की। आंदोलन खत्म कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका तक दायर की, लेकिन कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी।

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उल्टा हाईकोर्ट ने शिंदे सरकार को ट्रैफिक बाधित नहीं होने के आदेश दे दिए। मजबूरन सरकार को मांगें माननी पड़ीं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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