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‘वंदे मातरम् नहीं गाने वाले मदरसों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो’, नितेश राणे के बयान पर गरमाई महाराष्ट्र की सियासत

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने कहा कि जिन मदरसों में 'वंदे मातरम्' नहीं गाया जाता, उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कर देना चाहिए. राणे ने यह बयान सिंधुदुर्ग में तिरंगा रैली के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' बोलने को महत्वपूर्ण बताया.

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महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर धर्म और राष्ट्रवाद का मुद्दा गरमा गया है. बीजेपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे के एक बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. राणे ने कहा है कि जिन मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाया जाता, उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कर देना चाहिए. नितेश राणे ने यह बयान सिंधुदुर्ग में आयोजित तिरंगा रैली के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए दिया. उन्होंने कहा कि देश के प्रति गर्व की भावना हर व्यक्ति में होनी चाहिए और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ लोगों को तिरंगा रैली में शामिल होना चाहिए.

‘भारत माता की जय और वंदे मातरम् बोलना जरूरी’

तिरंगा रैली के दौरान नितेश राणे ने कहा कि देश के प्रति प्रेम और गर्व का प्रदर्शन करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भारत माता की जय और वंदे मातरम् बोलना सभी के लिए महत्वपूर्ण है. राणे के मुताबिक, जो लोग अपने ही देश में रहते हुए ‘वंदे मातरम्’ बोलने से परहेज करते हैं, उनके देश प्रेम पर सवाल खड़ा होता है. इसी क्रम में उन्होंने कुछ संस्थाओं और मदरसों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मदरसों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर देना चाहिए, जहां वंदे मातरम् नहीं गाया जाता.

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बयान के बाद मुस्लिम संगठनों में नाराजगी

नितेश राणे के इस बयान के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं और मुस्लिम संगठनों की ओर से नाराजगी सामने आने लगी है. उनके बयान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर भी देखा जा रहा है. वहीं, विपक्षी दलों ने भी राणे के बयान को लेकर बीजेपी और महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार के मंत्री ऐसे बयानों के जरिए समाज में धार्मिक आधार पर तनाव बढ़ाने का काम कर रहे हैं.

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राष्ट्रवाद और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज

राणे के बयान के बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर राष्ट्रवाद, धार्मिक संस्थानों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज होने के आसार हैं. एक तरफ राष्ट्रगीत और राष्ट्रवाद को लेकर बीजेपी नेताओं की ओर से सख्त रुख सामने आता रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की ओर से धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा उठाया जा रहा है. फिलहाल, नितेश राणे के बयान को लेकर महाराष्ट्र की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है.

First published on: Aug 11, 2026 09:47 AM

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