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मुंबई

1 रुपये किलो प्याज… और जलती फसल! महाराष्ट्र में ‘लाल सोना’ उगाने वाले किसानों की आंखों में आंसू

Maharashtra onion farmers crisis: महाराष्ट्र में जिसे किसान 'लाल सोना' कहकर सींचते हैं, आज वही प्याज उनके आंसू निकाल रहा है. हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि महीनों के पसीने की कीमत महज 1 रुपये किलो लग रही है. बेबसी ऐसी कि एक किसान ने अपनी 600 बोरी फसल को आग के हवाले कर दिया, तो दूसरे को मंडी में प्याज बेचने के बाद मुनाफे के बजाय अपनी जेब से पैसे चुकाने पड़े. पढ़ें, मुंबई से संजीब रॉय और अंकुश जायसवाल की विशेष रिपोर्ट.

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Written By: Ankush jaiswal Updated: May 10, 2026 17:27
Maharashtra Onion Price, Farmer Protest, Onion Crisis, Agricultural News Hindi, Mandi Bhav

Maharashtra onion farmers crisis: महाराष्ट्र में कभी किसानों की कमाई का सहारा मानी जाने वाली प्याज आज उनके लिए घाटे और गुस्से की वजह बनती जा रही है. हालात ऐसे बन चुके हैं कि कहीं किसान अपनी मेहनत से उगाई गई फसल को आग के हवाले कर रहा है, तो कहीं मंडी में प्याज बेचने के बाद भी किसान को अपनी जेब से पैसे देने पड़ रहे हैं. धाराशिव और छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई दो तस्वीरों ने एक बार फिर राज्य की कृषि व्यवस्था, बाजार भाव और किसानों की बदहाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

धाराशिव में गुस्साए किसान ने 600 बोरी प्याज जलाई

धाराशिव जिले के भूम तालुका के टिंटराज गांव में प्याज उत्पादक किसान भगवान साबले ने अपनी ही फसल में आग लगा दी. भगवान साबले ने करीब चार एकड़ जमीन पर प्याज की खेती की थी. इनमें से ढाई एकड़ की फसल तैयार होकर 600 बोरियों में भर चुकी थी. किसान का कहना है कि इस फसल पर 3 से 4 लाख रुपये तक खर्च आया, लेकिन मंडी में प्याज का भाव सिर्फ 1 रुपये किलो मिल रहा था. इतनी कम कीमत में फसल बेचने का मतलब था सीधे भारी घाटा. गुस्से और हताशा में किसान ने पूरी प्याज की फसल में आग लगा दी. जिस प्याज को उगाने में महीनों की मेहनत लगी, वही देखते ही देखते धुएं में बदल गई. भगवान साबले की पीड़ा अब सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं रही, बल्कि यह उस नाराजगी की तस्वीर बन गई है जो राज्य के हजारों प्याज किसानों के भीतर सुलग रही है.

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1262 किलो प्याज बेचा, फिर भी जेब से देना पड़ा 1 रुपया

दूसरी घटना छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठण तालुका से सामने आई, जिसने किसानों की हालत की एक और दर्दनाक तस्वीर दिखाई. वरुडी गांव के किसान प्रकाश गलधर बड़ी उम्मीदों के साथ अपनी प्याज की फसल लेकर कृषि उपज मंडी पहुंचे थे. तीन महीने की मेहनत के बाद तैयार हुई फसल से उन्हें उम्मीद थी कि घर का खर्च निकलेगा, बच्चों की फीस भरी जाएगी और कुछ कर्ज कम होगा. लेकिन मंडी में जो हुआ, उसने उन्हें तोड़कर रख दिया. प्रकाश गलधर 25 बोरियों में भरकर 1262 किलो प्याज बेचने पहुंचे थे. मंडी में उन्हें भाव मिला सिर्फ 100 रुपये प्रति क्विंटल, यानी महज 1 रुपये किलो.

पूरी फसल बेचने पर किसान को कुल 1262 रुपये मिले. लेकिन हमाली, तुलाई, भराई, वाराई, बोरियों का खर्च और मंडी तक ढुलाई मिलाकर कुल खर्च 1263 रुपये हो गया. यानि किसान को अपनी जेब से 1 रुपया अतिरिक्त देना पड़ा. जिस किसान को फसल बेचकर राहत मिलनी चाहिए थी, वह घाटा लेकर घर लौटा.

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आखिर क्यों टूट रहा है प्याज किसान?

महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में गिना जाता है. नासिक, अहमदनगर, धाराशिव, बीड, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे जैसे इलाकों में लाखों किसान प्याज की खेती पर निर्भर हैं. लेकिन इस बार रिकॉर्ड उत्पादन, कमजोर निर्यात, स्टोरेज की कमी और बाजार में मांग घटने की वजह से प्याज के दाम जमीन पर आ गए हैं. कृषि बाजार के जानकारों का कहना है कि किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है. बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और ट्रांसपोर्ट का खर्च पहले से कहीं ज्यादा हो चुका है, लेकिन मंडियों में किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. कई जगहों पर किसानों को प्याज का भाव 2 से 5 रुपये किलो तक भी नहीं मिल पा रहा. ऐसे में खेती किसानों के लिए फायदे का नहीं बल्कि घाटे का सौदा बनती जा रही है.

सरकार पर बढ़ा दबाव

प्याज की गिरती कीमतों को लेकर अब सरकार पर भी दबाव बढ़ने लगा है. किसान संगठनों का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं दी गई तो आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन खड़े हो सकते हैं. किसानों की मांग है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था लागू करे, प्याज खरीद केंद्र शुरू करे और निर्यात नीति में राहत दे ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके.

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First published on: May 10, 2026 05:27 PM

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