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मुंबई

महाराष्ट्र में चौंकाने वाला मामला, 129 स्कूली बच्चों के सिर से छिनी छत, धूप में बैठने को हुए मजबूर

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में जिला परिषद की लापरवाही के कारण बच्चों के सिर से स्कूल की छत छिन गई है और अब उन्हें खुले मैदान में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है. इस स्कूल में पहली से सातवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं और स्कूल में 129 छात्र पढ़ रहे हैं. पढ़ें मुंबई से राहुल पांडे की रिपोर्ट

Author Edited By : Vijay Jain
Updated: Feb 16, 2026 20:28
Nanded school land dispute

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से हैरान और परेशान करने वाला मामला सामने आया है. यहां के जिला परिषद की लापरवाही का खामियाजा स्कूली छात्र को भुगतना पड़ रहा है. जिला परिषद ने ऐसी जगह पर स्कूल का निर्माण करा दिया था जो उसकी मालिकी की ही नहीं थी. अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन मालिक ने स्कूल में ताला ठोक दिया है और बच्चों पर खुले मैदान में बैठक कर शिक्षा लेनी पड़ रही है. यह मामला महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के हदगांव तहसील स्थित बंचिनचोली का है. जिला परिषद प्रशासन ने ऐसी जमीन पर स्कूल बनाया जो उसकी अपनी नहीं है. कोर्ट के फैसले के बाद जमीन मालिक ने स्कूल पर कब्जा जमाते हुए ताला लटका दिया है.

स्कूल में कुल छात्रों की संख्या 129

कई सरकारी जमीनों पर कब्जा करने और जमीन हड़पने के कई मामले देखे हैं. जिला परिषद द्वारा ऐसी जमीन पर स्कूल बनाने की घटना सामने आई है जो सरकार की अपनी नहीं है. यह घटना नांदेड़ के हदगांव तहसील के बंचिनचोली गांव की है. बंचिनचोली गांव में जिला परिषद स्कूल 1935 में बना था. अभी इस स्कूल में पहली से सातवीं तक की कक्षा हैं और स्कूल में 129 छात्र पढ़ रहे हैं. हाल ही में कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि यह स्कूल की जमीन देवराव पौल की है.

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ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को घेरा

2014 में देवराव पौल ने कोर्ट में दावा किया था कि स्कूल की जमीन उनकी मालकी है. कोर्ट ने उसी तरह फैसला सुनाते ही जमीन के असली मालिक देवराव पौल ने कोर्ट के आदेश पर जिला परिषद स्कूल पर ताला लगा दिया . स्कूल पर ताला लगने की वजह से इस स्कूल के छात्राओं को अब खुले जगह में पढ़ना पड़ रहा है. स्कूल समिति के अध्यक्ष , स्कूल के शिक्षक, ग्रामस्थ ने कहा कि जिला परिषद की लापरवाही के वजह से छात्राओं के साथ यह नौबत आई है. यहां के गांववालों और टीचरों ने सरकार से इसका हल निकालने की मांग की है. अब यह देखना जरूरी है कि जिला परिषद प्रशासन क्या कदम उठाएगा.

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First published on: Feb 16, 2026 08:28 PM

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