Maharashtra MP Border Bridge Collapse: महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को आपस में जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण रास्ते पर बना पुल मानसून की पहली ही बारिश में ताश के पत्तों की तरह बह गया. चौंकाने वाली बात यह है कि इस पुल का निर्माण महज एक महीने पहले ही पूरा हुआ था. पुल के अचानक बह जाने से दोनों राज्यों के बीच आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं.
घटना शिरपुर तालुका के रिच्यापाड़ा की है. इस पुल का निर्माण जिला परिषद कंस्ट्रक्शन और शिरपुर पंचायत समिति कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के जिला एनुअल प्लान के तहत लाखों रुपये की लागत से कराया गया था. यह रास्ता महाराष्ट्र के पलासनेर और मध्य प्रदेश के अंबापानी समेत कई ग्रामीण इलाकों को आपस में जोड़ता है. सालों से लोग गड्ढों भरे रास्ते से आने-जाने को मजबूर थे, लेकिन एक महीने पहले बना यह नया पुल भी भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की चढ़ गया.
पुल पर बैठकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
पुल टूटने से गुस्साए दोनों राज्यों के स्थानीय लोगों ने मौके पर ही बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. ग्रामीण (सुरेश यादव, लाल सिंह चौहान, आसीराम पवारा और हरसिंह नाथू पवार) का कहना है कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए लाखों रुपये का बजट जारी करती है, लेकिन अफसर और ठेकेदार मिलकर घटिया काम करते हैं.
इंजीनियरिंग और निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
सिर्फ 30 दिनों के भीतर पुल के बह जाने से अब प्रशासनिक लापरवाही की पोल खुल गई है. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और लापरवाही बरतने वाले सरकारी इंजीनियरों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही, जल्द से जल्द बेहतर क्वालिटी का नया पुल बनाने की मांग की जा रही है ताकि दोनों राज्यों का संपर्क फिर से बहाल हो सके.
Maharashtra MP Border Bridge Collapse: महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को आपस में जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण रास्ते पर बना पुल मानसून की पहली ही बारिश में ताश के पत्तों की तरह बह गया. चौंकाने वाली बात यह है कि इस पुल का निर्माण महज एक महीने पहले ही पूरा हुआ था. पुल के अचानक बह जाने से दोनों राज्यों के बीच आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं.
घटना शिरपुर तालुका के रिच्यापाड़ा की है. इस पुल का निर्माण जिला परिषद कंस्ट्रक्शन और शिरपुर पंचायत समिति कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के जिला एनुअल प्लान के तहत लाखों रुपये की लागत से कराया गया था. यह रास्ता महाराष्ट्र के पलासनेर और मध्य प्रदेश के अंबापानी समेत कई ग्रामीण इलाकों को आपस में जोड़ता है. सालों से लोग गड्ढों भरे रास्ते से आने-जाने को मजबूर थे, लेकिन एक महीने पहले बना यह नया पुल भी भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की चढ़ गया.
पुल पर बैठकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
पुल टूटने से गुस्साए दोनों राज्यों के स्थानीय लोगों ने मौके पर ही बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. ग्रामीण (सुरेश यादव, लाल सिंह चौहान, आसीराम पवारा और हरसिंह नाथू पवार) का कहना है कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए लाखों रुपये का बजट जारी करती है, लेकिन अफसर और ठेकेदार मिलकर घटिया काम करते हैं.
इंजीनियरिंग और निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
सिर्फ 30 दिनों के भीतर पुल के बह जाने से अब प्रशासनिक लापरवाही की पोल खुल गई है. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और लापरवाही बरतने वाले सरकारी इंजीनियरों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही, जल्द से जल्द बेहतर क्वालिटी का नया पुल बनाने की मांग की जा रही है ताकि दोनों राज्यों का संपर्क फिर से बहाल हो सके.