BMC Election 2025: बीएमसी ने निकाली वार्ड लॉटरी, किसकी किस्मत चमकी, किसकी फिसली? BJP को लगा झटका!

मुंबई में बीएमसी चुनाव की सरगर्मी लगातार बढ़ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि 31 जनवरी से पहले सभी महानगर पालिकाओं के चुनाव कराए जाएं. इनमें देश की सबसे अमीर नगरपालिका, मुंबई की बीएमसी भी शामिल है.
इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है क्योंकि शिवसेना के विभाजन के बाद पहली बार मुंबई में बीएमसी चुनाव हो रहे हैं. अब नजरें इस पर टिकी हैं कि मुंबई की सत्ता पर किसका कब्जा रहेगा — शिंदे का, शिवसेना या उद्धव का?

BMC Election 2025

मुंबई में बीएमसी चुनाव की सरगर्मी लगातार बढ़ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि 31 जनवरी से पहले सभी महानगर पालिकाओं के चुनाव कराए जाएं. इनमें देश की सबसे अमीर नगरपालिका, मुंबई की बीएमसी भी शामिल है.
इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है क्योंकि शिवसेना के विभाजन के बाद पहली बार मुंबई में बीएमसी चुनाव हो रहे हैं. अब नजरें इस पर टिकी हैं कि मुंबई की सत्ता पर किसका कब्जा रहेगा — शिंदे का, शिवसेना या उद्धव का?

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उद्धव बनाम शिंदे: मुंबई की सत्ता पर असली जंग

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मिलकर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं, जबकि शिंदे की शिवसेना महायुति का हिस्सा बनकर पूरी तैयारी में जुटी है. मुकाबला कांटे का होगा और मुंबई की गलियों में पोस्टरों से लेकर बयानबाजी तक का शोर तेज रहेगा.

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बीएमसी की वार्ड लॉटरी: किसकी किस्मत चमकी, किसकी फिसली

चुनाव से पहले प्रशासन ने 227 वार्डों की आरक्षण लॉटरी कराई, जिसमें कई बड़े नेताओं की किस्मत खुली तो कई के लिए यह झटका साबित हुई. दो दर्जन से ज़्यादा पूर्व नगरसेवकों की सीटें या तो ओबीसी के लिए आरक्षित हो गईं या महिलाओं के लिए. बीएमसी में नेता विपक्ष रहे रवि राजा, नील सोमैया, ज्योति अलवाणी, हर्षिता नार्वेकर, कप्तान मलिक, दीपक ठाकुर, विद्यार्थी सिंह और तेजस्वी घोसालकर जैसे नाम इस लॉटरी से प्रभावित हुए हैं. कुल 227 सीटों में से 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी के लिए भी अलग कोटा तय किया गया है.

शिंदे की लॉटरी चमकी, उद्धव और बीजेपी की फिसली

वार्ड आरक्षण की लॉटरी में शिंदे की शिवसेना के लिए किस्मत ने साथ दिया. पार्टी की अधिकांश महिला नगर सेविकाओं के वार्ड सुरक्षित रह गए, जबकि उद्धव गुट और बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं की सीटें आरक्षित वर्गों में चली गईं. अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित वार्ड नंबर 53 और 121 की मौजूदा नगरसेविकाएँ रेखा रामवंशी और चंद्रावती मोरे शिंदे गुट से हैं. वहीं समृद्धि काते (वार्ड 146) और अंजली नाईक (वार्ड 147) के वार्ड अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं. ओबीसी महिलाओं के आरक्षण में भी शिंदे गुट की नगरसेविकाएँ शामिल हैं रिद्धी खुरसुंगे (वार्ड 11), गीता सिंघल (वार्ड 12), संध्या दोशी (वार्ड 18), सुवर्णा कारंजे (वार्ड 117) और अश्विनी हांडे (वार्ड 128). इसी तरह वैशाली शेवाळे (वार्ड 142), राजूल पटेल (वार्ड 61) और ऋजुता तारी (वार्ड 143) के वार्ड भी महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं. इससे साफ है कि आरक्षण की लॉटरी शिंदे सेना के लिए फायदेमंद साबित हुई है.

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उद्धव गुट और बीजेपी को झटका

महिलाओं के लिए आरक्षण ने उद्धव गुट और बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. उद्धव की शिवसेना के वरिष्ठ नगरसेवक अनिल पाटणकर (वार्ड 153) का वार्ड अब ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया है. वसंत नकाशे (वार्ड 186) और श्रीकांत शेट्ये (वार्ड 155) के वार्ड अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं. इन बदलावों से उद्धव गुट के कई वरिष्ठ नेताओं को अपने पुराने इलाके छोड़ने पड़ सकते हैं. वहीं बीजेपी के 14 मौजूदा नगरसेवकों के वार्ड भी महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं, जिससे पार्टी को रणनीति दोबारा तय करनी होगी.

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी प्रभावित

आरक्षण की आंच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी तक पहुंची है. कांग्रेस के तीन और समाजवादी पार्टी के एक नगरसेवक का वार्ड ओपन कैटेगरी की महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है. इस बार की लॉटरी में हर दल को किसी न किसी रूप में असर झेलना पड़ा — फर्क बस इतना है कि किसी की लॉटरी लगी, तो किसी की सीट खिसक गई.

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