झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और धांधली को लेकर छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 10वें दिन भी जारी रही. विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. भारी सुरक्षा और डॉक्टरों की देखरेख के बावजूद देवेन्द्र ने अस्पताल के बिस्तर से ही अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है. सदर अस्पताल से जारी अपने एक खुले पत्र में देवेन्द्र नाथ महतो ने लिखा, “मेरा शरीर अस्पताल में उपचाराधीन है, लेकिन न्याय के लिए संघर्ष और संकल्प पूरी तरह अडिग है. झारखंडी छात्रों को जब तक सम्पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, मेरी भूख हड़ताल जारी रहेगी.”
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‘लाठी से नहीं दबेगी युवाओं की आवाज’
देवेन्द्र नाथ महतो ने राज्य सरकार से मांग की है कि विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच कराई जाए. साथ ही, जिन अधिकारियों या पुलिसकर्मियों ने अनावश्यक बल प्रयोग किया है, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए. देवेन्द्र ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य, पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था के लिए है.
युवाओं से शांति और एकजुटता की अपील
देवेन्द्र महतो ने आंदोलनकारी युवाओं और छात्रों से संयम, एकजुटता और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीका बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि झारखंड के छात्र-युवाओं के न्याय, सम्मान, पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था के अधिकार के लिए है.
आंदोलन संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे भी जारी रहेगा. लाठी और बल प्रयोग से युवाओं के हौसले को तोड़ा नहीं जा सकता.
डॉक्टरों के मुताबिक, 10 दिनों से भूखे रहने के कारण उनका शरीर काफी कमजोर हो गया है और उनकी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.
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लाठी के जवाब में फूल, शोर के बजाय मौन
एक तरफ जहां अस्पताल में देवेन्द्र का संघर्ष जारी है, वहीं दूसरी ओर रांची की सड़कों पर छात्रों का अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध देखने को मिला. सोमवार को हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार शाम जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक छात्रों ने एक मौन जुलूस निकाला. बिना किसी नारेबाजी और शोर-शराबे के निकले इस जुलूस में छात्रों के हाथों में जलती हुई मोबाइल की फ्लैश लाइटें थीं. अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचने पर प्रदर्शनकारी छात्रों ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को गुलाब का फूल भेंट किया. ‘लाठी के जवाब में फूल’ देकर छात्रों ने यह संदेश दिया कि उनका आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और अनुशासित है.
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