झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा बयान दिया है. झारखंड विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि JPSC और CGL समेत सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की पूरी जांच कराई जाएगी. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि सरकार की मंशा साफ है और युवाओं को न्याय दिलाकर ही दम लिया जाएगा. इसी मुद्दे पर मंगलवार को विधानसभा में भारी हंगामा हुआ, हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा सुधार से जुड़ी छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं और बाकी मांगों पर भी सकारात्मक विचार किया जा रहा है.
लखनऊ की कंपनी और यूपी-बिहार के लोगों पर आरोप
मुख्यमंत्री सोरेन ने सदन में कहा कि राज्य में परीक्षाएं आयोजित कराने वाली लखनऊ की ‘TDPL’ कंपनी ने उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ लोगों के साथ मिलकर परीक्षाओं में गड़बड़ी की है. उन्होंने कहा कि इस कंपनी द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की गहन जांच होगी. इसके अलावा, भविष्य में पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षाएं आयोजित करने के लिए सरकार IIT के विशेषज्ञों की मदद भी लेगी. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों के आंदोलन की आड़ में केवल राजनीति कर रहा है. मुख्यमंत्री के संबोधन के साथ ही सदन की कार्यवाही को 12 अगस्त की जगह 11 को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.
गरीबों की जेब का पैसा कहां जा रहा है, आज सबने देख लिया’
सदन परिसर में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आप सबने देखा कि सदन में नोट उछाले गए और उनका प्रदर्शन किया गया. यही नोट भाजपा की मौजूदगी और उनकी राजनीति का असली आधार हैं. केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से गरीबों, जरूरतमंदों और युवाओं की जेब से पैसा निकाला जा रहा है. आज देश और प्रदेश ने देख लिया कि वह पैसा आखिर जा कहां रहा है.’ विपक्ष पर हमला जारी रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास विपक्ष के हर सवाल का जवाब है, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी हैं. भाजपा के लिए सच्चाई का सामना करना बेहद मुश्किल हो गया है. इसी बौखलाहट और पीड़ा के कारण सदन को तय समय से पहले स्थगित करना पड़ा.
क्या है पूरा मामला?
झारखंड में छात्र 25 जुलाई से JPSC और JSSC की परीक्षाओं में पारदर्शिता, गड़बड़ी की जांच और दोषी एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. सोमवार को हजारों छात्रों ने विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला था, जहां पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले छोड़े थे, जिसमें कई छात्र और 14 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.