9 राज्यों में 70 लाख की आबादी, कैसे रहता है देश का तीसरा सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय 'संथाल' ; जिसके लिए शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन किया था समर्पित

Santhal community 70 lakh population in 9 states: संथाल समुदाय ने 1855-56 में संथाल हूल आंदोलन किया था। ये समुदाय देश के 9 राज्यों में रहता है। ये देश का तीसरा सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है। झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन ने संथाल समुदाय के अधिकारों के लिए आंदोलन किया था।

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संथाल समुदाय

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Shibu Soren Funeral: झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। आज उनके पैतृक गांव नेमरा में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। दरअसल, ‘दिशोम गुरु’ एक संथाली शब्द है।

झारखंड में देश के तीसरे सबसे बड़े आदिवासी समाज संथाली के लिए शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। समुदाय, के प्रति अपने समर्पण और नेतृत्व के लिए ही उन्हें दिशोम गुरु की उपाधि दी गई थी। आइए आपको इस खबर में बताते हैं कि संथाली समाज कौन होते हैं, ये लोग देश के किन-किन राज्यों में रहते है और क्या करते हैं?

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देशभर में 70 लाख की आबादी, साल 1855 में किया था विद्रोह

देश में साल 2011 में हुई जनगणना के अनुसार भारत में संथाल समुदाय की करीब 70 लाख से अधिक आबादी है। ये समुदाय झारखंड के अलावा बिहार, असम, बांग्लादेश, नेपाल, पश्चिम बंगाल समेत सात राज्यों में रहते हैं। ये देश का तीसरा सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है। जानकारी के अनुसार संथाल समुदाय 1855-56 में संथाल हूल (विद्रोह) के लिए जाना जाता है। समुदाय ने ये आंदोलन अपने अपने अधिकारों के लिए किया था।

सामुदायिक एकता और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किया आंदोलन

संथाल समुदाय समृद्ध आदिवासी समूह है जो अपनी परंपराओं, प्रकृति के प्रति प्रेम और सामुदायिक एकता के लिए जाने जाते हैं। ब्रिटिश काल में समुदाय ने ब्रिटिश शासन और जमींदारों के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था। इसके अलावा सरकार के भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी समेत अन्य मुद्दों पर विद्रोह के चलते अक्सर समुदाय सुर्खियों में बना रहता है।

प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव है पहचान, संथाली है भाषा

संथाल समुदाय अपनी जीवनशैली और संस्कृति से जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। इतिहासकारों के अनुसार संथाल एक ऑस्ट्रो-एशियाटिक (मुंडा) भाषा समूह से संबंधित आदिवासी समुदाय है। इनकी मातृभाषा संथाली है जो देश की 22 अनुसूचित भाषाओं में शामिल है। बता दें समुदाय के लोग अपने पारंपरिक धर्म ‘सारना’ का पालन करते हैं। समाज के लिए सूर्य प्रकृति और अपने पूर्वजों की पूजा करते हैं।

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लेखक के बारे में

Amit Kasana

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अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.
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