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गुजरात में UCC को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी, उत्तराखंड के बाद बना दूसरा राज्य

गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी है. राज्य सरकार द्वारा नियमों की अधिसूचना जारी होते ही यह कानून पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगा. उत्तराखंड के बाद अब गुजरात देश का ऐसा दूसरा राज्य बन गया है जहां सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा.

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गुजरात विधानसभा ने इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कर मंजूरी के लिए केंद्र और राष्ट्रपति भवन भेजा था. Credit: File Photo

गुजरात में समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ा कदम सामने आया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात यूसीसी बिल को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति की मुहर लगने के साथ ही राज्य में इस कानून को लागू करने की अंतिम संवैधानिक बाधा भी दूर हो गई है. उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने अपने यहां समान नागरिक संहिता को कानूनी रूप से स्वीकार किया है. इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाकर सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू करना है. यह बहुविवाह को प्रतिबंधित करता है और अवैध लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण न कराने पर दंड का प्रावधान करता है.

यह भी पढ़ें: गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित, अब शादी, संपत्ति और तलाक के लिए होगा एक नियम

नियमों की अधिसूचना जारी होते ही लागू होगा कानून

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने विधानसभा में भारी चर्चा और गहमागहमी के बीच UCC बिल को पारित कर दिया था. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बिल पेश करते हुए इसे ‘समानता और न्याय’ का प्रतीक बताया था. गुजरात विधानसभा ने इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कर मंजूरी के लिए केंद्र और राष्ट्रपति भवन भेजा था. राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है. गृह विभाग और संबंधित प्रशासनिक निकाय इससे जुड़े नियम तैयार करने में जुटे हैं. जैसे ही राज्य सरकार इन नियमों की आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगी, यह पूरे गुजरात में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा.

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गुजरात UCC बिल की मुख्य बातें

  • शादी, तलाक और पैतृक संपत्ति के लिए सभी धर्मों में एक समान कानून
  • बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान हिस्सेदारी का अधिकार
  • लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
  • जबरन शादी और बहुविवाह पर 7 साल तक की सजा
  • कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य, उल्लंघन पर 3 साल की सजा
  • लिव-इन रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने की सजा
  • नाबालिग के साथ लिव-इन पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई
  • कुछ समुदायों की परंपराओं (जैसे कजिन मैरिज) में कोई बदलाव नहीं
  • आदिवासी समुदायों को बिल के दायरे से बाहर रखा गया

विवाह, तलाक और उत्तराधिकार पर क्या बदलेगा?

समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद राज्य के सभी नागरिकों पर विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, पैतृक संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान कानून लागू होगा. इसमें सभी धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह साझा कानूनी ढांचा काम करेगा. इसके तहत विवाह का अनिवार्य पंजीकरण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं.

यह भी पढ़ें: गुजरात विधानसभा में पेश हुआ UCC बिल , राज्यपाल की मुहर के बाद जल्द ही पारित होगा कानून

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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