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गुजरात

गुजरात में साइबर ठगी का बढ़ता खतरा: 45% शिकार वरिष्ठ नागरिक

गुजरात में साइबर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं, जिसमें 45% पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं. बुजुर्गों को फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट और निवेश के झांसे में लाकर ठग लाखों रुपये ठग रहे हैं, इसलिए डिजिटल जागरूकता बेहद जरूरी है.

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Written By: bhupendra.thakur Updated: Mar 23, 2026 21:38

गुजरात में साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, और सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इन मामलों में लगभग 45 प्रतिशत पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं. ठग खासतौर पर बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वे तकनीक के मामले में अपेक्षाकृत कम जागरूक होते हैं और आसानी से भरोसा कर लेते हैं.

साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं. इनमें फर्जी कॉल, KYC अपडेट, निवेश का लालच, डिजिटल अरेस्ट और सरकारी अधिकारी बनकर डराना जैसे तरीके शामिल हैं. कई मामलों में ठग खुद को पुलिस, CBI या बैंक अधिकारी बताकर बुजुर्गों को डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं.

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विशेषज्ञों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनका भरोसेमंद स्वभाव और डिजिटल प्रक्रियाओं की सीमित समझ है. कई बार ठग भावनात्मक तरीके भी अपनाते हैं, जैसे रोते हुए फोन करना या मदद मांगना, जिससे बुजुर्ग जल्दी प्रभावित हो जाते हैं.

गुजरात में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां बुजुर्गों से लाखों रुपये की ठगी की गई. कहीं KYC अपडेट के नाम पर बैंक डिटेल ली गई, तो कहीं “डिजिटल अरेस्ट” दिखाकर डराया गया. पुलिस और साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है. लोगों को यह समझना जरूरी है कि कोई भी बैंक या सरकारी एजेंसी फोन पर OTP या निजी जानकारी नहीं मांगती.

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साइबर ठगों के बढ़ते जाल के बीच सबसे ज्यादा खतरे में वरिष्ठ नागरिक हैं. ऐसे में जरूरी है कि परिवार के सदस्य भी बुजुर्गों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करें, ताकि वे इस तरह की ठगी से बच सकें.

First published on: Mar 23, 2026 09:38 PM

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