---विज्ञापन---

दिल्ली

वक्फ बिल विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट! क्या होगा इसका भविष्य और कौन करेगा सुनवाई?

वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है जिसमें इसे असंवैधानिक करार देने की मांग उठाई गई है। इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और AIMIM सांसद असद्दुदीन ओवैसी भी याचिका दायर कर चुके हैं। याचिकाओं में बिल को संविधान के मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया गया है। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की संभावना जताई जा रही है।

Author Reported By : Prabhakar Kr Mishra Edited By : Namrata Mohanty Updated: Apr 5, 2025 15:07
Waqf Amendment Bill
Waqf Amendment Bill

वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई है। आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ संशोधन कानून में बदलाव को चुनौती दी है। अमानतुल्लाह खान ने वक्फ कानून में है संशोधन को असंवैधानिक करार देने की मांग की है। वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ यह तीसरी याचिका है। इससे पहले कांग्रेस सांसद मो.जावेद और AIMIM सांसद असद्दुदीन ओवैसी भी याचिका दायर कर चुके हैं। अभी कुछ याचिकाएं और दायर होंगी। कुछ याचिकाएं इसके समर्थन में भी आएंगी, इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मोहम्मद जावेद ने वक्फ कानून में संशोधन को मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताया है। मोहम्मद जावेद लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के सचेतक हैं और वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य थे। उन्होंने तर्क दिया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 25 (धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता), 26 (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता), 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) और 300 ए (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

---विज्ञापन---

वक्फ संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों से पास तो हो गया है लेकिन अभी तक राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है। इसलिए तकनीकी तौर पर अभी तक यह विधेयक क़ानून नहीं बना है। लेकिन विरोध करने वालों को चुनौती देने की इतनी जल्दी है कि बिल को कानून बनने का इंतज़ार भी नहीं हो पा रहा। जबकि सुप्रीम कोर्ट कई मौकों पर कह चुका है कि जबतक कानून अस्तित्व में नहीं आ जाता, किसी विधेयक के खिलाफ सुनवाई नहीं हो सकती। लेकिन याचिका कर्ताओं को इस बात का भरोसा है कि एक दो दिन में विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल ही जाएगी।

अब सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या कर सकता है!

सुप्रीम कोर्ट को किसी भी कानून की समीक्षा करने का अधिकार है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस कानून की भी समीक्षा कर सकता है। लेकिन, किसी संसद से पास हुए कानून में न्यायिक दखल की कुछ शर्तें होती हैं! अदालत में यह साबित करना होता है कि संबंधित कानून नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। अगर वह कानून संविधान के मूलभूत ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला है तब भी कोर्ट उसकी समीक्षा कर सकता है। वक् संशोधन कानून को चुनौती देने वालों को पहले कोर्ट में ये साबित करना होगा कि इससे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है या संविधान के मूलभूत ढ़ांचे को नुकसान होगा।

कानून पर तत्काल रोक की मांग उठेगी!

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के पहले दिन ही याचिका कर्ता इस कानून पर तत्काल रोक की मांग कर सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट सामान्यतया संसद से पास कानून पर बिना विस्तृत सुनवाई के रोक नहीं लगाता। तत्काल रोक के लिए यह साबित करना होगा कि इस कानून पर रोक नहीं लगने से जो नुकसान होगा, उसकी बाद में भरपाई नहीं हो पाएगी। ऐसी सूरत में कोर्ट अंतरिम रोक लगा सकता है।

संविधान पीठ करेगी सुनवाई!

वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं में यह दलील दी गई है कि कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 25 (धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता), 26 (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता), 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) और 300 ए (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है। यह भी आधार लिया जा सकता है कि यह कानून संविधान के आधारभूत ढांचे के ख़िलाफ़ है। सुनवाई के दौरान मौलिक अधिकारों और संविधान के आधारभूत ढांचे पर बहस की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस मामले पर संविधान पीठ सुनवाई कर सकती है!

कौन करेगा सुनवाई!

वक्फ संशोधन कानून पर संविधान पीठ सुनवाई कर सकती है। कम से कम पांच जजों की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी। और इसमें लंबी सुनवाई की जरूरत होगी। मौजूदा मुख्यन्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना का कार्यकाल खत्म होने वाला है। जस्टिस खन्ना अगले महीने 13 मई को रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में, इस बात की संभावना है कि जस्टिस खन्ना इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे! इस मामले की सुनवाई अगले मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई में होगी। वरिष्ठाक्रम के मुताबिक अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई बनने वाले हैं।

ये भी पढ़ें- नोएडा में सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के पास बेशकीमती संपत्ति, प्रशासन ने की तैयारी

HISTORY

Edited By

Namrata Mohanty

Reported By

Prabhakar Kr Mishra

First published on: Apr 05, 2025 03:07 PM

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

संबंधित खबरें