वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई है। आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ संशोधन कानून में बदलाव को चुनौती दी है। अमानतुल्लाह खान ने वक्फ कानून में है संशोधन को असंवैधानिक करार देने की मांग की है। वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ यह तीसरी याचिका है। इससे पहले कांग्रेस सांसद मो.जावेद और AIMIM सांसद असद्दुदीन ओवैसी भी याचिका दायर कर चुके हैं। अभी कुछ याचिकाएं और दायर होंगी। कुछ याचिकाएं इसके समर्थन में भी आएंगी, इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मोहम्मद जावेद ने वक्फ कानून में संशोधन को मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताया है। मोहम्मद जावेद लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के सचेतक हैं और वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य थे। उन्होंने तर्क दिया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 25 (धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता), 26 (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता), 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) और 300 ए (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
वक्फ संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों से पास तो हो गया है लेकिन अभी तक राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है। इसलिए तकनीकी तौर पर अभी तक यह विधेयक क़ानून नहीं बना है। लेकिन विरोध करने वालों को चुनौती देने की इतनी जल्दी है कि बिल को कानून बनने का इंतज़ार भी नहीं हो पा रहा। जबकि सुप्रीम कोर्ट कई मौकों पर कह चुका है कि जबतक कानून अस्तित्व में नहीं आ जाता, किसी विधेयक के खिलाफ सुनवाई नहीं हो सकती। लेकिन याचिका कर्ताओं को इस बात का भरोसा है कि एक दो दिन में विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल ही जाएगी।
#WaqfAmendmentAct को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती। कांग्रेस MP मोहम्मद जावेद ने वक्फ क़ानून में बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अभी बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बिल, एक्ट बनेगा। लेकिन पिटिशन में एक्ट कहा गया है। याचिका…---विज्ञापन---— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) April 4, 2025
अब सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या कर सकता है!
सुप्रीम कोर्ट को किसी भी कानून की समीक्षा करने का अधिकार है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस कानून की भी समीक्षा कर सकता है। लेकिन, किसी संसद से पास हुए कानून में न्यायिक दखल की कुछ शर्तें होती हैं! अदालत में यह साबित करना होता है कि संबंधित कानून नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। अगर वह कानून संविधान के मूलभूत ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला है तब भी कोर्ट उसकी समीक्षा कर सकता है। वक् संशोधन कानून को चुनौती देने वालों को पहले कोर्ट में ये साबित करना होगा कि इससे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है या संविधान के मूलभूत ढ़ांचे को नुकसान होगा।
कानून पर तत्काल रोक की मांग उठेगी!
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के पहले दिन ही याचिका कर्ता इस कानून पर तत्काल रोक की मांग कर सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट सामान्यतया संसद से पास कानून पर बिना विस्तृत सुनवाई के रोक नहीं लगाता। तत्काल रोक के लिए यह साबित करना होगा कि इस कानून पर रोक नहीं लगने से जो नुकसान होगा, उसकी बाद में भरपाई नहीं हो पाएगी। ऐसी सूरत में कोर्ट अंतरिम रोक लगा सकता है।
#WaqfAmendmentBill के खिलाफ एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर। आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान वक्फ़ संशोधन कानून में बदलाव को चुनौती दी। @news24tvchannel
— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) April 5, 2025
संविधान पीठ करेगी सुनवाई!
वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं में यह दलील दी गई है कि कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 25 (धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता), 26 (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता), 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) और 300 ए (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है। यह भी आधार लिया जा सकता है कि यह कानून संविधान के आधारभूत ढांचे के ख़िलाफ़ है। सुनवाई के दौरान मौलिक अधिकारों और संविधान के आधारभूत ढांचे पर बहस की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस मामले पर संविधान पीठ सुनवाई कर सकती है!
कौन करेगा सुनवाई!
वक्फ संशोधन कानून पर संविधान पीठ सुनवाई कर सकती है। कम से कम पांच जजों की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी। और इसमें लंबी सुनवाई की जरूरत होगी। मौजूदा मुख्यन्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना का कार्यकाल खत्म होने वाला है। जस्टिस खन्ना अगले महीने 13 मई को रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में, इस बात की संभावना है कि जस्टिस खन्ना इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे! इस मामले की सुनवाई अगले मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई में होगी। वरिष्ठाक्रम के मुताबिक अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई बनने वाले हैं।
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