साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के पेइंग गेस्ट (PG) वाली 50 साल पुरानी 5 मंजिला इमारत गिरने से दिल्ली दहल गई है. घटनास्थल का जायजा लेने और एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में घायलों से मिलने पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सख्त कदम उठाने की बात कही है. सीएम ने एलान किया कि ढहे हुए पीजी के ठीक बगल में मौजूद इमारत बेहद जर्जर और खतरनाक हो चुकी है. इसे ‘अनसेफ’ घोषित कर दिया गया है और बुधवार को इसे पूरी तरह ढहा दिया जाएगा. इस दर्दनाक हादसे में 5 छात्रों और 2 मजदूरों समेत कुल 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया. इन 7 मृतकों में दो मजदूर भी शामिल थे.
इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य व चल रहे इलाज की पूरी जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिजनों से बातचीत कर उन्हें हर संभव सरकारी मदद का भरोसा दिलाया.उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती एक मजदूर की हालत अब स्थिर है, हालांकि उसके पैर में गंभीर चोटें आई हैं और उसका इलाज जारी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावितों में पांच छात्र भी शामिल थे. इनमें से दो छात्र अब पूरी तरह ठीक हैं और उन्हें आज ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी.
मुख्यमंत्री ने परिजनों को आश्वस्त किया है कि घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं दी जाएंगी. इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को सरकार की तरफ से पूरी आर्थिक सहायता दी जाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया है, वे शवों को लेकर दिल्ली से रवाना हो चुके हैं और प्रशासन ने इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम पूरे किए थे. दिल्ली सरकार लगातार सभी परिवारों के संपर्क में है और दुख की इस घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है.
पीजी मालिक समेत 3 गिरफ्तार, 5 अधिकारी सस्पेंड
हादसे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 81 वर्षीय पीजी मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया. इसके साथ ही उसकी पत्नी उर्मिला गुप्ता (75) और बेटे महेश गुप्ता (52) को भी हिरासत में लिया गया है. कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम (MCD) ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश गुप्ता सहित पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट में 10 सितंबर को सुनवाई
इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा है. वहीं, अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां 10 सितंबर को सुनवाई हो सकती है. पुलिस ने घटनास्थल पर नेटवर्क जैमर लगाए जाने की अफवाहों का भी खंडन किया है.
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