Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

दिल्ली

‘मुझे नहीं बनना सब-इंस्पेक्टर, मै कांस्टेबल ही ठीक…’, सब इंस्पेक्टर ने भेजा डिमोशन का लेटर

दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर की अजीबो गरीब रिक्वेस्ट से पुलिस महकमा हैरान है. अब इंस्पेक्टर का लेटर बना चर्चा का विषय. चर्चा हो भी क्यों ना. क्योंकि एस आई साहब की प्रार्थना ही कुछ ऐसी है. दिल्ली के उत्तर पूर्वी जिले के एक पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस सब इंस्पेक्टर ने हाल ही में अपने आला अधिकारियों के सामने एक रिक्वेस्ट की. रिक्वेस्ट ऐसी थी जिसे पहले तो अधिकारी समझे ही नहीं और सोचने लगे शायद एसआई की तबीयत नासाज है और उन्हें आराम की जरूरत है. पढ़े नई दिल्ली से विमल कौशिक की रिपोर्ट.

Author
Edited By : Versha Singh Updated: Mar 12, 2026 14:57

दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर की अजीबो गरीब रिक्वेस्ट से पुलिस महकमा हैरान है. अब इंस्पेक्टर का लेटर बना चर्चा का विषय. चर्चा हो भी क्यों ना. क्योंकि एस आई साहब की प्रार्थना ही कुछ ऐसी है. दिल्ली के उत्तर पूर्वी जिले के एक पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस सब इंस्पेक्टर ने हाल ही में अपने आला अधिकारियों के सामने एक रिक्वेस्ट की. रिक्वेस्ट ऐसी थी जिसे पहले तो अधिकारी समझे ही नहीं और सोचने लगे शायद एसआई की तबीयत नासाज है और उन्हें आराम की जरूरत है.

लेकिन इसके उलट सब इंस्पेक्टर ने साफ कर दिया कि न ही उनकी तबियत खराब है न ही वो बहके हैं. वो तो बस अब अपनी पदोन्नति को वापस करवाना चाहता हैं.

---विज्ञापन---

दरअसल ये सब इंस्पेक्टर कांस्टेबल के तौर पर भरती हुआ था बाद में पदोन्नत होकर अब इंस्पेक्टर बना दिया गया. लेकिन खुश होने के बजाय अब ये अपनी ड्यूटी से आजिज आकर चाहते हैं कि उन्हें वापस कांस्टेबल बना दिया जाए.

इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की पेंशन सेल की ओर से सभी संबंधित इकाइयों को पत्र भेजा गया है. ये मामला अपने आप में बेहद अजीब है. लिहाजा किसी के समझ नहीं आ रहा कि कैसे इसे अमली जामा पहनाया जाए. इस मामले में आगे की कार्रवाई से पहले पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों और इकाइयों से रिपोर्ट मांगी है.

---विज्ञापन---

पत्र में कहा गया है कि यह बताया जाए कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई विभागीय जांच, आपराधिक मामला, विजिलेंस जांच, निलंबन, शिकायत, ओवरपेमेंट, मेडिकल या अनुपस्थिति से जुड़ा कोई मामला लंबित तो नहीं है. साथ ही नो डिमांड सर्टिफिकेट भी तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है. यदि तय समय में कोई जानकारी नहीं दी जाती है तो इसे ‘निल रिपोर्ट’ माना जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस मामले को लेकर जब जिले के आला अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने इसे विभागीय मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया.

First published on: Mar 12, 2026 02:57 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.