दिल्ली वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब धौला कुआं और ITO पर नहीं लगेगा लंबा जाम, सरकार का ये है नया मेगा प्लान
Delhi Traffic: दिल्ली की पांच सबसे व्यस्त सड़कों को 'मॉडल रोड' बनाने के लिए चुना गया है, जिससे आधुनिक फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम के जरिए भारी जाम और प्रदूषण से राहत मिलेगी.
Delhi Traffic: दिल्ली में हर दिन लाखों लोग सड़कों पर भारी जाम, धूल और कंक्रीट की तपिश से परेशान होते हैं. शाम के समय आईटीओ से गुजरने वाला या दफ्तर के समय धौला कुआं पार करने वाला कोई भी व्यक्ति दिल्ली की सड़कों के हाल से अच्छी तरह परिचित है. गाड़ियों की लंबी कतारें, लगातार हॉर्न की आवाजें, टूटे-फूटे फुटपाथ और हवा में उड़ती धूल दिल्ली के लोगों की रोज की कहानी बन चुकी है. इस समस्या का पक्का समाधान निकालने के लिए सरकार ने एक बड़ी और नई प्रायोगिक पहल शुरू की है. इसके तहत राजधानी के पांच सबसे व्यस्त और भारी ट्रैफिक वाले रास्तों को 'मॉडल रोड' के रूप में पूरी तरह बदलने की तैयारी की जा रही है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य मकसद सिर्फ सड़कों के गड्ढे भरना या मरम्मत करना नहीं है, बल्कि पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप देकर धूल-मुक्त, हरा-भरा और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित बनाना है.
इन 5 सबसे व्यस्त कॉरिडोर का होगा कायाकल्प
इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली के उन इलाकों को चुना गया है जहां रोजाना सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम का दबाव रहता है. पहले कॉरिडोर में मिंटो रोड से आईटीओ होते हुए कड़कड़डूमा तक की सड़क शामिल है जो सेंट्रल दिल्ली को ईस्ट दिल्ली से जोड़ती है. दूसरा रूट मिंटो रोड से अरुणा आसफ अली मार्ग और जवाहरलाल नेहरू मार्ग होते हुए दिल्ली गेट तक का है. तीसरा कॉरिडोर नेताजी सुभाष मार्ग, शांति वन और महात्मा गांधी मार्ग (यमुना बैंक) से होते हुए आईटीओ और आईपी एस्टेट मेट्रो स्टेशन तक जाता है. चौथा सबसे व्यस्त रूट धौला कुआं से जेल रोड और करियप्पा मार्ग होते हुए तिलक नगर क्रॉसिंग तक का है. पांचवां कॉरिडोर उत्तम नगर से तिलक नगर और राजौरी गार्डन (नजफगढ़ रोड) के बीच चुना गया है जो पश्चिमी दिल्ली की लाइफलाइन है.
इस नए प्रोजेक्ट के तहत इन पांचों सड़कों को चौड़ा करने के बजाय 'संपूर्ण सड़कों' के रूप में विकसित किया जाएगा जहां हर वर्ग की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा. सबसे पहले इन चुनी गई सड़कों पर जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए मानसून से पहले एक मजबूत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा. पैदल चलने वालों के लिए यहां आधुनिक और चौड़े फुटपाथ विकसित किए जाएंगे और साइकिल चालकों के लिए अलग से ट्रैक बनेंगे. सड़कों के किनारों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के उपाय किए जाएंगे और रात के समय बेहतर रोशनी के लिए स्मार्ट स्ट्रीटलाइट और साफ दिखने वाले साइनबोर्ड लगाए जाएंगे. इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों तक पैदल जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए चौराहों के पास सुरक्षित क्रॉसिंग पॉइंट बनाए जाएंगे.
कनेक्टिविटी सुधरने से बढ़ेंगे दाम
दिल्ली में बेहतर सड़कें और साफ माहौल हमेशा से प्रॉपर्टी की मांग को तेजी से बढ़ाते हैं. यही वजह है कि उत्तम नगर में घर तलाश रहे या राजौरी गार्डन और धौला कुआं के पास फ्लैट देख रहे लोगों के बीच इस घोषणा से हलचल मच गई है. वर्तमान में धौला कुआं के पास फ्लैट्स की कीमत 18,000 से 30,000 रुपये प्रति वर्ग फुट और राजौरी गार्डन में 14,000 से 24,000 रुपये प्रति वर्ग फुट चल रही है. स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि आजकल किराएदार और खरीदार घर लेने से पहले सफर की सुविधा और सड़कों की हालत को जरूर देखते हैं. अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो आने वाले समय में इन व्यस्त रास्तों पर सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों का कीमती समय बचेगा और दिल्ली की सड़कों की पूरी तस्वीर बदल जाएगी.
Delhi Traffic: दिल्ली में हर दिन लाखों लोग सड़कों पर भारी जाम, धूल और कंक्रीट की तपिश से परेशान होते हैं. शाम के समय आईटीओ से गुजरने वाला या दफ्तर के समय धौला कुआं पार करने वाला कोई भी व्यक्ति दिल्ली की सड़कों के हाल से अच्छी तरह परिचित है. गाड़ियों की लंबी कतारें, लगातार हॉर्न की आवाजें, टूटे-फूटे फुटपाथ और हवा में उड़ती धूल दिल्ली के लोगों की रोज की कहानी बन चुकी है. इस समस्या का पक्का समाधान निकालने के लिए सरकार ने एक बड़ी और नई प्रायोगिक पहल शुरू की है. इसके तहत राजधानी के पांच सबसे व्यस्त और भारी ट्रैफिक वाले रास्तों को ‘मॉडल रोड’ के रूप में पूरी तरह बदलने की तैयारी की जा रही है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य मकसद सिर्फ सड़कों के गड्ढे भरना या मरम्मत करना नहीं है, बल्कि पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप देकर धूल-मुक्त, हरा-भरा और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित बनाना है.
इन 5 सबसे व्यस्त कॉरिडोर का होगा कायाकल्प
इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली के उन इलाकों को चुना गया है जहां रोजाना सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम का दबाव रहता है. पहले कॉरिडोर में मिंटो रोड से आईटीओ होते हुए कड़कड़डूमा तक की सड़क शामिल है जो सेंट्रल दिल्ली को ईस्ट दिल्ली से जोड़ती है. दूसरा रूट मिंटो रोड से अरुणा आसफ अली मार्ग और जवाहरलाल नेहरू मार्ग होते हुए दिल्ली गेट तक का है. तीसरा कॉरिडोर नेताजी सुभाष मार्ग, शांति वन और महात्मा गांधी मार्ग (यमुना बैंक) से होते हुए आईटीओ और आईपी एस्टेट मेट्रो स्टेशन तक जाता है. चौथा सबसे व्यस्त रूट धौला कुआं से जेल रोड और करियप्पा मार्ग होते हुए तिलक नगर क्रॉसिंग तक का है. पांचवां कॉरिडोर उत्तम नगर से तिलक नगर और राजौरी गार्डन (नजफगढ़ रोड) के बीच चुना गया है जो पश्चिमी दिल्ली की लाइफलाइन है.
इस नए प्रोजेक्ट के तहत इन पांचों सड़कों को चौड़ा करने के बजाय ‘संपूर्ण सड़कों’ के रूप में विकसित किया जाएगा जहां हर वर्ग की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा. सबसे पहले इन चुनी गई सड़कों पर जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए मानसून से पहले एक मजबूत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा. पैदल चलने वालों के लिए यहां आधुनिक और चौड़े फुटपाथ विकसित किए जाएंगे और साइकिल चालकों के लिए अलग से ट्रैक बनेंगे. सड़कों के किनारों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के उपाय किए जाएंगे और रात के समय बेहतर रोशनी के लिए स्मार्ट स्ट्रीटलाइट और साफ दिखने वाले साइनबोर्ड लगाए जाएंगे. इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों तक पैदल जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए चौराहों के पास सुरक्षित क्रॉसिंग पॉइंट बनाए जाएंगे.
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कनेक्टिविटी सुधरने से बढ़ेंगे दाम
दिल्ली में बेहतर सड़कें और साफ माहौल हमेशा से प्रॉपर्टी की मांग को तेजी से बढ़ाते हैं. यही वजह है कि उत्तम नगर में घर तलाश रहे या राजौरी गार्डन और धौला कुआं के पास फ्लैट देख रहे लोगों के बीच इस घोषणा से हलचल मच गई है. वर्तमान में धौला कुआं के पास फ्लैट्स की कीमत 18,000 से 30,000 रुपये प्रति वर्ग फुट और राजौरी गार्डन में 14,000 से 24,000 रुपये प्रति वर्ग फुट चल रही है. स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि आजकल किराएदार और खरीदार घर लेने से पहले सफर की सुविधा और सड़कों की हालत को जरूर देखते हैं. अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो आने वाले समय में इन व्यस्त रास्तों पर सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों का कीमती समय बचेगा और दिल्ली की सड़कों की पूरी तस्वीर बदल जाएगी.