Dwarka Hit and Run Case:‘मेरा बेटा सुबह 11:30 बजे ऑफिस के लिए निकला था. रील बनाने के चक्कर में उन लोगों ने मेरे बेटे को मार डाला. वह स्कॉर्पियो इतनी तेज थी कि साहिल को संभलने का मौका ही नहीं मिला. टक्कर के बाद मेरा बच्चा सड़क पर 10 मिनट तक तड़पता रहा, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की’ यह दर्द है 23 वर्षीय साहिल की मां इन्ना माकन का. इन्ना ने कहा, “मैंने अपने बेटे को 23 साल तक अकेले एक सिंगल मदर के रूप में पाला-पोसा. वह बहुत टैलेंटेड, मेहनती और होनहार लड़का था. उसका सपना मैनचेस्टर जाना था, लेकिन एक स्कॉर्पियो ने उसे बेरहमी से मार डाला.” उन्होंने आगे कहा कि यह महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है. उन्होंने रईसजादों की इस मानसिकता पर भी सवाल उठाए कि वे सड़क को अपनी जागीर समझते हैं.
दिल्ली : साहिल धनेश्रा की मां ने रोते हुए बेटे के लिए मांगा इंसाफ
◆ द्वारका में 3 फरवरी को एक नाबालिग की स्कॉर्पियो ने 23 वर्षीय साहिल धनेशरा को टक्कर मार दी
◆ घटना में साहिल की मौत हो गई, उसके बाद आरोपी को जमानत मिल गई, अब मृतक की मां इंसाफ की मांग कर रही है#Dwarka |… pic.twitter.com/Qh4du3o0TY---विज्ञापन---— News24 (@news24tvchannel) February 17, 2026
I lost my son sahil Dhaneshra a 22+ year old young and most talented boy whom I raised for 23 years alone as a single mom ,was killed brutally by a scorpio N bearing no.UP57BM3057 driver is an unlicensed driver and his sister while making speed fun reels in #dwarka #delhipolice pic.twitter.com/RiAx6HkO6x
— Inna Makan (@inna_makan) February 14, 2026
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कब और कैसे हुआ हादसा?
यह दर्दनाक हादसा 3 फरवरी 2026 को सुबह करीब 11:57 बजे द्वारका सेक्टर-11 में लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के पास हुआ. साहिल अपनी यामाहा स्पोर्ट्स बाइक पर ऑफिस जा रहे थे. तेज रफ्तार महिंद्रा स्कॉर्पियो N (नंबर UP57BM3057) ने पहले उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मारी, फिर गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़ी एक कैब से जा भिड़ी. साहिल की मौके पर ही मौत हो गई. कैब चालक अजीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया.
जांच में चौंकाने वाले खुलासे
जांच में पता चला कि SUV चला रहा 19 वर्षीय अक्षत्रा सिंह (नाबालिग) था, जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. वह अपनी बहन के साथ गाड़ी में बैठकर स्पीड और फन रील्स बना रहा था. पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस SUV पर पहले से ही 13 चालान दर्ज थे, जिनमें ज्यादातर ओवरस्पीडिंग के थे. ये चालान दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कटे हुए थे. इससे साफ है कि गाड़ी का मालिक और चालक ट्रैफिक नियमों की बार-बार अनदेखी करते रहे हैं.
आरोपी को मिली जमानत
कानून की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस नाबालिग ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया, उसे बोर्ड परीक्षाओं का हवाला देकर अंतरिम जमानत मिल गई. मां इन्ना का कहना है कि वे बेटे के अंतिम संस्कार में टूटी हुई थीं, तभी आरोपी को रिहा कर दिया गया. परिवार अब सिर्फ एक ही मांग कर रहा है—निष्पक्ष जांच और सच्चा न्याय. ताकि किसी और मां को अपना बेटा इस तरह खोना न पड़े. इन्ना माकन सोशल मीडिया पर लगातार अपील कर रही हैं कि लोग उनकी मदद करें.
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