Delhi police vacant post: दिल्ली पुलिस में लगातार पद खाली होते जा रहे हैं। भर्ती न होने के कारण काफी पद खाली हैं। दिल्ली में फिलहाल 50890 सिपाहियों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन 9267 पद खाली पड़े हैं। जिसके कारण लगातार बढ़ रही आबादी के आगे पुलिस की तादाद कम होती जा रही है। इस समय दिल्ली में आबादी के हिसाब से पुलिस को बढ़ाने की जरूरत है। पुलिस की कमी के कारण दिल्ली में लगातार स्ट्रीट क्राइम बढ़ रहा है। रोज कहीं न कहीं लूट, झपटमारी की वारदात हो रही हैं।
महिलाएं बदमाशों के निशाने पर, कब रुकेंगी वारदात
महिलाओं को भी बदमाश अपने निशाने पर ले रहे हैं। पुलिस की कमी का असर थानों, चौकियों और बीट पर देखा जा सकता है। पुलिस में अभी 41623 सिपाही हैं। एसीपी 177 हैं, लेकिन पद 346 स्वीकृत हैं। इंस्पेक्टर 1452 चाहिए। तैनात 1431 हैं। 8085 एसआई की जरूरत है, जबकि पोस्टेड सिर्फ 6144 हैं। एएसआई 7312 चाहिए, जबकि ड्यूटी पर 7062 हैं। 23708 हवलदारों की जरूरत है, लेकिन कार्यरत 21753 हैं।
यह भी पढ़ें-Delhi Pollution: ‘दमघोंटू हवा’ के लिए दोषी कौन? डेढ़ लाख से अधिक चालान, फिर भी नहीं किसी का ध्यान
गृह मंत्रालय की ओर से भी सिपाहियों के पदों को भरने की कवायद शुरू नहीं की गई है। थानों और यूनिटों के लिए हर हाल में सिपाही चाहिए। जिसकी कमी से न तो क्राइम रेट गिर रहा है। न ही अपराधी पकड़े जा रहे हैं। लगातार पुलिस के सामने चुनौती खड़ी हो रही है। सिपाहियों की कमी के कारण लगातार राजधानी की सड़कें सूनी नजर आती हैं।
लोगों की डिमांड-सड़कों पर दिखे पुलिस
लोगों का कहना है कि अगर पुलिस नहीं दिखाई देगी, तो लूटपाट और झपटमारी के मामले कैसे रुकेंगे। हालांकि कोरोना के बाद से लगातार भर्ती की कवायद शुरू हुई थी, लेकिन फिर भी पुलिस के पद नहीं भरे जा रहे हैं। इसके पीछे वजह भी खास है। एक बार भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दो साल लगते हैं। लेकिन इसी बीच जितने लोग फोर्स में आते हैं। उससे ज्यादा रिटायर हो जाते हैं। जिसके कारण हाल यही रहता है।
https://youtu.be/s8BWsB7p4CI
Delhi police vacant post: दिल्ली पुलिस में लगातार पद खाली होते जा रहे हैं। भर्ती न होने के कारण काफी पद खाली हैं। दिल्ली में फिलहाल 50890 सिपाहियों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन 9267 पद खाली पड़े हैं। जिसके कारण लगातार बढ़ रही आबादी के आगे पुलिस की तादाद कम होती जा रही है। इस समय दिल्ली में आबादी के हिसाब से पुलिस को बढ़ाने की जरूरत है। पुलिस की कमी के कारण दिल्ली में लगातार स्ट्रीट क्राइम बढ़ रहा है। रोज कहीं न कहीं लूट, झपटमारी की वारदात हो रही हैं।
महिलाएं बदमाशों के निशाने पर, कब रुकेंगी वारदात
महिलाओं को भी बदमाश अपने निशाने पर ले रहे हैं। पुलिस की कमी का असर थानों, चौकियों और बीट पर देखा जा सकता है। पुलिस में अभी 41623 सिपाही हैं। एसीपी 177 हैं, लेकिन पद 346 स्वीकृत हैं। इंस्पेक्टर 1452 चाहिए। तैनात 1431 हैं। 8085 एसआई की जरूरत है, जबकि पोस्टेड सिर्फ 6144 हैं। एएसआई 7312 चाहिए, जबकि ड्यूटी पर 7062 हैं। 23708 हवलदारों की जरूरत है, लेकिन कार्यरत 21753 हैं।
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गृह मंत्रालय की ओर से भी सिपाहियों के पदों को भरने की कवायद शुरू नहीं की गई है। थानों और यूनिटों के लिए हर हाल में सिपाही चाहिए। जिसकी कमी से न तो क्राइम रेट गिर रहा है। न ही अपराधी पकड़े जा रहे हैं। लगातार पुलिस के सामने चुनौती खड़ी हो रही है। सिपाहियों की कमी के कारण लगातार राजधानी की सड़कें सूनी नजर आती हैं।
लोगों की डिमांड-सड़कों पर दिखे पुलिस
लोगों का कहना है कि अगर पुलिस नहीं दिखाई देगी, तो लूटपाट और झपटमारी के मामले कैसे रुकेंगे। हालांकि कोरोना के बाद से लगातार भर्ती की कवायद शुरू हुई थी, लेकिन फिर भी पुलिस के पद नहीं भरे जा रहे हैं। इसके पीछे वजह भी खास है। एक बार भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दो साल लगते हैं। लेकिन इसी बीच जितने लोग फोर्स में आते हैं। उससे ज्यादा रिटायर हो जाते हैं। जिसके कारण हाल यही रहता है।