DDA News: दिल्ली जैसे महानगरों में खुद का घर होना किसी बड़े सपने के सच होने से कम नहीं है. अस्पताल, स्कूल, यूनिवर्सिटी, परिवहन, रोड आदि तरह-तरह की सुविधाएं और रोजगार के अवसर इस शहर को रहने के लिए सबसे खास बनाते हैं. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ी परेशान होती है घर खरीदना. दिल्ली में आज के वक्त में घर खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं है, यहां महंगी जमीन, महंगी फ्लैट्स, लोगों की सालों की बचत एक झटके में खत्म कर देती है.
लेकिन लोगों की इस बचत को बचाए रखने और उनके खुद का घर होने के सपने को पूरा करने के लिए DDA दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी Delhi Development Authority ने नई ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत राजधानी में मेट्रो कॉरिडोर के आसपास बड़े पैमाने पर हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित करने की तैयारी तेज कर दी है. इस नीति के तहत लोग सस्ते दाम में अपना खुद का घर ले सकेंगे. बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों को चुना है, जहां ये फ्लैट्स बनाएं जाएंगे और वहां से मेट्रो कनेक्टिविटी मजबूत होगी, ताकि लोगों को अच्छी सुविधा मिले.
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निजी बिल्डर्स को भी मिलेगा बड़ा मौका
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) अब अपनी नई TOD नीति के तहत निजी बिल्डर्स को भी प्रोजेक्ट्स में शामिल करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए एक खास ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां चिन्हित जमीनों की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी. इसी प्लेटफॉर्म पर प्राइवेट डेवलपर्स अपने प्लॉट्स का विवरण अपलोड कर सकेंगे और TOD नीति के तहत विकास की अनुमति के लिए आवेदन कर पाएंगे.
अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही डेवलपमेंट प्लान को अंतिम मंजूरी मिलेगी, संबंधित भूखंडों का लैंड यूज स्वतः TOD कैटेगरी में बदल जाएगा. बताया जा रहा है कि फिलहाल चार निजी डेवलपर्स इस योजना में रुचि दिखा चुके हैं. ऑनलाइन आवेदन आने के बाद प्रस्ताव सीधे डीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता वाली समिति के पास भेजा जाएगा, जहां तय समय सीमा के भीतर मंजूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
कहां बनेंगे ये फ्लैट्स?
DDA द्वारा चिह्नित जमीनों का कुल क्षेत्रफल 3.6 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है. ये जमीनें दिल्ली मेट्रो की ब्लू, रेड, ग्रीन, पिंक और येलो लाइन के आसपास स्थिति हैं. इनमें पूर्वी दिल्ली में दिलशाद गार्डन, झिलमिल, प्रीत विहार, कड़कड़डूमा, और मडांवली- फजलपुर जैसे इलाकें इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं. वहीं, द्वारका सेक्टर-10 और सेक्टर-12 में भी ब्लू लाइन के पास कई प्लॉट चुने गए हैं. इसके अलावा रोहिणी सेक्टर-18, मादीपुर और पीरागढ़ी को भी योजना में शामिल किया गया है.
क्या है TOD कॉरिडोर?
TOD कॉरिडोर एक नीति है, जिसके तहत मेट्रो, रेलवे स्टेशन और रीजनल रैपिड ट्रांजिट के आसपास के 500 मीटर के दायरे में जो जमीनें हैं, वह इस कॉरिडोर में शामिल किया जाएगा. इस नीति को लेकर सरकार का मानना है कि इससे लोगों को रहने, काम करने और सार्वजनिक परिवहन तक पहुंचने में आसानी होगी, जिससे सड़क पर गाड़ियों का दबाव कम होगा और दिल्ली में प्रदूषण का स्तर भी काबू में रहेगा.
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DDA News: दिल्ली जैसे महानगरों में खुद का घर होना किसी बड़े सपने के सच होने से कम नहीं है. अस्पताल, स्कूल, यूनिवर्सिटी, परिवहन, रोड आदि तरह-तरह की सुविधाएं और रोजगार के अवसर इस शहर को रहने के लिए सबसे खास बनाते हैं. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ी परेशान होती है घर खरीदना. दिल्ली में आज के वक्त में घर खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं है, यहां महंगी जमीन, महंगी फ्लैट्स, लोगों की सालों की बचत एक झटके में खत्म कर देती है.
लेकिन लोगों की इस बचत को बचाए रखने और उनके खुद का घर होने के सपने को पूरा करने के लिए DDA दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी Delhi Development Authority ने नई ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत राजधानी में मेट्रो कॉरिडोर के आसपास बड़े पैमाने पर हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित करने की तैयारी तेज कर दी है. इस नीति के तहत लोग सस्ते दाम में अपना खुद का घर ले सकेंगे. बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों को चुना है, जहां ये फ्लैट्स बनाएं जाएंगे और वहां से मेट्रो कनेक्टिविटी मजबूत होगी, ताकि लोगों को अच्छी सुविधा मिले.
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निजी बिल्डर्स को भी मिलेगा बड़ा मौका
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) अब अपनी नई TOD नीति के तहत निजी बिल्डर्स को भी प्रोजेक्ट्स में शामिल करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए एक खास ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां चिन्हित जमीनों की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी. इसी प्लेटफॉर्म पर प्राइवेट डेवलपर्स अपने प्लॉट्स का विवरण अपलोड कर सकेंगे और TOD नीति के तहत विकास की अनुमति के लिए आवेदन कर पाएंगे.
अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही डेवलपमेंट प्लान को अंतिम मंजूरी मिलेगी, संबंधित भूखंडों का लैंड यूज स्वतः TOD कैटेगरी में बदल जाएगा. बताया जा रहा है कि फिलहाल चार निजी डेवलपर्स इस योजना में रुचि दिखा चुके हैं. ऑनलाइन आवेदन आने के बाद प्रस्ताव सीधे डीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता वाली समिति के पास भेजा जाएगा, जहां तय समय सीमा के भीतर मंजूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
कहां बनेंगे ये फ्लैट्स?
DDA द्वारा चिह्नित जमीनों का कुल क्षेत्रफल 3.6 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है. ये जमीनें दिल्ली मेट्रो की ब्लू, रेड, ग्रीन, पिंक और येलो लाइन के आसपास स्थिति हैं. इनमें पूर्वी दिल्ली में दिलशाद गार्डन, झिलमिल, प्रीत विहार, कड़कड़डूमा, और मडांवली- फजलपुर जैसे इलाकें इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं. वहीं, द्वारका सेक्टर-10 और सेक्टर-12 में भी ब्लू लाइन के पास कई प्लॉट चुने गए हैं. इसके अलावा रोहिणी सेक्टर-18, मादीपुर और पीरागढ़ी को भी योजना में शामिल किया गया है.
क्या है TOD कॉरिडोर?
TOD कॉरिडोर एक नीति है, जिसके तहत मेट्रो, रेलवे स्टेशन और रीजनल रैपिड ट्रांजिट के आसपास के 500 मीटर के दायरे में जो जमीनें हैं, वह इस कॉरिडोर में शामिल किया जाएगा. इस नीति को लेकर सरकार का मानना है कि इससे लोगों को रहने, काम करने और सार्वजनिक परिवहन तक पहुंचने में आसानी होगी, जिससे सड़क पर गाड़ियों का दबाव कम होगा और दिल्ली में प्रदूषण का स्तर भी काबू में रहेगा.
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