---विज्ञापन---

दिल्ली angle-right

दिल्ली में अस्पतालों की लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, ICU में मरीज को बेड न मिलने पर दिया ऑडिट का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के 38 सरकारी अस्पतालों में नेक्स्टजेन ई-हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम यानी HMIS को अचानक ऑडिट करने का आदेश दिया है. हाल ही में एक बुजुर्ग महिला को एलएनजेपी हॉस्पिटल में आईसीयू बेड न देने पर मिलने पर ये मामला सुर्खियों में आया था.

---खबर नीचे जारी है---

मुख्य बिंदु

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने 38 सरकारी अस्पतालों में अचानक ऑडिट का आदेश दिया.
  • ये ऑडिट ऑनलाइन अवेलेबिलिटी के बावजूद ICU बेड देने से मना करने की कथित घटना के बाद हो रहा है.
  • NIC 31 जुलाई, 2026 तक HMIS के लागू होने की निगरानी करेगा.
  • कोर्ट ने 10–20 डेडिकेटेड लाइनों वाली एक टोल-फ्री इमरजेंसी हेल्पलाइन का सुझाव दिया.
  • इस मामले में अगली सुनवाई 7 अगस्त, 2026 को तय की गई है.

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के 38 अस्पतालों में ‘NextGen e-Hospital Management Information System’ (HMIS) का अचानक ऑडिट करने का आदेश दिया है. ये आदेश तब दिया गया जब एक मरीज को ICU बेड देने से मना कर दिया गया, जबकि ऑनलाइन पोर्टल पर बेड उपलब्ध दिखा रहा था. कोर्ट ने यह निर्देश राष्ट्रीय राजधानी में हेल्थकेयर सेवाओं और सरकारी अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई मामलों की सुनवाई के दौरान दिए.

---खबर नीचे जारी है---

क्या है HMIS का यूज?

HMIS प्लेटफ़ॉर्म को अस्पतालों के कामकाज को डिजिटल बनाने और हेल्थकेयर सेवाओं के बारे में रियल-टाइम जानकारी देने के लिए शुरू किया गया था. यह ‘Delhi ICU Beds Saarthi’ ऐप के साथ मिलकर काम करता है, जो अस्पतालों में इमरजेंसी आईसीयू बेड की अवेलेबिलिटी दिखाता है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे सिस्टम से मरीजों को सही जानकारी मिलने और इमरजेंसी के वक्त वक्त पर इलाज मिलने में मदद मिलनी चाहिए.

कब उठा ये मामला?

ये मामला तब सामने आया जब कोर्ट को बताया गया कि सांस लेने में तकलीफ़ से जूझ रही एक 70 साल की बुजुर्ग महिला को लोक नायक जय प्रकाश (LNJP) अस्पताल में ICU में भर्ती करने से मना कर दिया गया. उनके परिवार का दावा था कि जब वो अस्पताल पहुंचे तो ऑनलाइन पोर्टल पर दो आईसीयू बेड खाली दिख रहे थे. उन्होंने ये भी कहा कि अस्पताल की हेल्पलाइन पर बार-बार कॉल करने के बावजूद बेड की अवेलेबिलिटी के बारे में कोई काम की जानकारी नहीं मिली.

---खबर नीचे जारी है---

हाई कोर्ट ने जताई चिंता

इस हालात को चिंता का विषय बताते हुए बेंच ने कहा कि इस घटना से डिजिटल आईसीयू बेड मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने में संभावित कमियों का पता चलता है. जजों ने ये भी कहा कि HMIS प्लेटफॉर्म दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में एक जैसा काम नहीं कर रहा है, जिससे मरीजों को मिलने वाले रियल-टाइम डेटा की रिलायबिलिटी पर सवाल उठते हैं.

इंस्पेक्शन के आदेश

कोर्ट ने नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को 31 जुलाई 2026 तक सभी 38 अस्पतालों का सरप्राइज इंस्पेक्शन करने का निर्देश दिया. ऑडिट में ये देखा जाएगा कि क्या आईसीयू बेड की जानकारी सही ढंग से अपडेट की जा रही है, क्या इमरजेंसी हेल्पलाइन कॉल का तुरंत जवाब दिया जा रहा है, और क्या HMIS सिस्टम सभी अस्पतालों में सही ढंग से लागू किया जा रहा है. दिल्ली सरकार से 10-20 डेडिकेटेडफोन लाइनों वाली टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू करने और रेफर किए गए मरीजों को समय पर भर्ती सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर विचार करने को भी कहा गया है. इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त 2026 को होगी.

---खबर नीचे जारी है---

निष्कर्ष

दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का मकसद राजधानी की हेल्थकेयर सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बेहतर बनाना है. अचानक ऑडिट का आदेश देकर और एक डेडिकेटेड इमरजेंसी हेल्पलाइन की सिफारिश करके, कोर्ट ने सही डिजिटल रिकॉर्ड और तुरंत मेडिकल मदद के अहमियत पर जोर दिया है. इन उपायों से हॉस्पिटल मैनेजमेंट मजबूत होने, मरीजों की ICU सुविधाओं तक पहुंच बेहतर होने और इमरजेंसी के समय टेक्नोलॉजी-बेस्ड हेल्थकेयर सेवाओं के असरदार ढंग से काम करने की उम्मीद है, जिससे आखिरकार दिल्ली के मरीजों को फायदा होगा.

Frequently Asked Questions

ये ऑडिट तब करने का आदेश दिया गया जब ऑनलाइन पोर्टल पर अवेलेबिलिटी दिखाने के बावजूद एक मरीज को ICU बेड देने से मना कर दिया गया.
नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) दिल्ली सरकार के 38 अस्पतालों में अचानक ऑडिट करेगा.
'NextGen e-Hospital Management Information System' (HMIS) एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो हॉस्पिटल के कामकाज को मैनेज करता है और रियल-टाइम हेल्थकेयर जानकारी देता है.
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से ICU बेड की जानकारी और इमरजेंसी मदद के लिए 10–20 लाइनों वाली टोल-फ्री हेल्पलाइन पर विचार करने को कहा.
इस मामले पर अगली सुनवाई 7 अगस्त, 2026 को तय की गई है.
First published on: Jul 08, 2026 11:51 AM

End of Article

About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

Read More

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola