Delhi Airport Expansion: दिल्ली एयरपोर्ट का बदलने जा रहा नक्शा! 2033 तक बंद हो सकता है टर्मिनल 2, T3 का होगा महा-विस्तार
दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. साल 2033 तक टर्मिनल-2 बंद हो सकता है, जबकि टर्मिनल-3 का विस्तार कर नया पियर-E बनाया जाएगा. साथ ही ड्राइवरलेस एयर ट्रेन शुरू होगी, जिससे यात्रियों को तेज और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. जानिए इस पूरी परियोजना के बारे में.
Written By: Azhar Naim|Updated: May 31, 2026 16:23
Edited By : Azhar Naim|Updated: May 31, 2026 16:23
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दिल्ली एयरपोर्ट का बदलने वाला है हुलिया. (Image: AI)
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देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल दिल्ली एयरपोर्ट आने वाले सालों में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. बढ़ती यात्री संख्या और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एयरपोर्ट प्रबंधन ने एक नई मास्टर प्लान पर काम शुरू किया है. इस योजना के तहत मौजूदा टर्मिनल-2 को चरणबद्ध तरीके से बंद करने और टर्मिनल-3 का बड़े स्तर पर विस्तार करने की तैयारी की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, माना जा रहा है कि साल 2033 तक टर्मिनल-2 का संचालन पूरी तरह समाप्त हो सकता है, इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना, भीड़भाड़ कम करना और एयरपोर्ट संचालन को अधिक आधुनिक बनाना है.
नई योजना के तहत टर्मिनल-3 में पियर-E नाम का एक नया और आधुनिक सेक्शन विकसित किया जाएगा. यह नया पियर हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा. खास बात यह है कि यह क्षमता लगभग मौजूदा टर्मिनल-2 के बराबर मानी जा रही है. पियर-E के तैयार होने के बाद टर्मिनल-2 से संचालित होने वाली घरेलू उड़ानों को धीरे-धीरे टर्मिनल-3 में स्थानांतरित किया जाएगा. इससे एयरपोर्ट के संचालन को एक ही बड़े केंद्र के तहत अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा और यात्रियों को भी टर्मिनल बदलने की परेशानी कम होगी.
एयर ट्रेन और नई सुविधाओं से सफर होगा और आसान
दिल्ली एयरपोर्ट की इस महत्वाकांक्षी योजना में एक आधुनिक ड्राइवरलेस एयर ट्रेन सिस्टम भी शामिल है. यह स्वचालित सेवा टर्मिनल-1, टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 के बीच तेज और सुगम कनेक्टिविटी प्रदान करेगी. इसके अलावा एयरोसिटी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. एयरपोर्ट प्रबंधन का लक्ष्य है कि आने वाले लगभग 30 महीनों में यह सुविधा यात्रियों के लिए उपलब्ध हो जाए, ताकि इससे कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को काफी सुविधा मिले और एयरपोर्ट परिसर के भीतर यात्रा का समय भी कम हो.
भविष्य के लिए जरूरी है ये बदलाव
वैश्विक स्तर पर विमान डिलीवरी में देरी, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए एयरपोर्ट प्रबंधन सावधानीपूर्वक योजना बना रहा है. एयरलाइंस के साथ लगातार चर्चा कर भविष्य की यात्री मांग का आकलन किया जा रहा है, इसी के आधार पर नए पियर और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण की समयसीमा तय की जाएगी. हाल ही में टर्मिनल-3 के एक हिस्से को अंतरराष्ट्रीय संचालन के लिए विकसित किया गया है, जिससे इसकी क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्तार दिल्ली एयरपोर्ट को आने वाले सालों में दुनिया के प्रमुख एविएशन हब में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.
देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल दिल्ली एयरपोर्ट आने वाले सालों में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. बढ़ती यात्री संख्या और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एयरपोर्ट प्रबंधन ने एक नई मास्टर प्लान पर काम शुरू किया है. इस योजना के तहत मौजूदा टर्मिनल-2 को चरणबद्ध तरीके से बंद करने और टर्मिनल-3 का बड़े स्तर पर विस्तार करने की तैयारी की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, माना जा रहा है कि साल 2033 तक टर्मिनल-2 का संचालन पूरी तरह समाप्त हो सकता है, इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना, भीड़भाड़ कम करना और एयरपोर्ट संचालन को अधिक आधुनिक बनाना है.
नई योजना के तहत टर्मिनल-3 में पियर-E नाम का एक नया और आधुनिक सेक्शन विकसित किया जाएगा. यह नया पियर हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा. खास बात यह है कि यह क्षमता लगभग मौजूदा टर्मिनल-2 के बराबर मानी जा रही है. पियर-E के तैयार होने के बाद टर्मिनल-2 से संचालित होने वाली घरेलू उड़ानों को धीरे-धीरे टर्मिनल-3 में स्थानांतरित किया जाएगा. इससे एयरपोर्ट के संचालन को एक ही बड़े केंद्र के तहत अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा और यात्रियों को भी टर्मिनल बदलने की परेशानी कम होगी.
एयर ट्रेन और नई सुविधाओं से सफर होगा और आसान
दिल्ली एयरपोर्ट की इस महत्वाकांक्षी योजना में एक आधुनिक ड्राइवरलेस एयर ट्रेन सिस्टम भी शामिल है. यह स्वचालित सेवा टर्मिनल-1, टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 के बीच तेज और सुगम कनेक्टिविटी प्रदान करेगी. इसके अलावा एयरोसिटी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. एयरपोर्ट प्रबंधन का लक्ष्य है कि आने वाले लगभग 30 महीनों में यह सुविधा यात्रियों के लिए उपलब्ध हो जाए, ताकि इससे कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को काफी सुविधा मिले और एयरपोर्ट परिसर के भीतर यात्रा का समय भी कम हो.
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भविष्य के लिए जरूरी है ये बदलाव
वैश्विक स्तर पर विमान डिलीवरी में देरी, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए एयरपोर्ट प्रबंधन सावधानीपूर्वक योजना बना रहा है. एयरलाइंस के साथ लगातार चर्चा कर भविष्य की यात्री मांग का आकलन किया जा रहा है, इसी के आधार पर नए पियर और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण की समयसीमा तय की जाएगी. हाल ही में टर्मिनल-3 के एक हिस्से को अंतरराष्ट्रीय संचालन के लिए विकसित किया गया है, जिससे इसकी क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्तार दिल्ली एयरपोर्ट को आने वाले सालों में दुनिया के प्रमुख एविएशन हब में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.