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छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार राज्य के लोगों की बेहतरी के लिए हर समय काम करती है। अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शिक्षा को लेकर भी कई कदम उठा रही है। इसमें युक्तियुक्तकरण नीति यानी रेशनलाइजेशन पॉलिसी को लाया गया है। जिसके तहत अब कोई कक्षा खाली नहीं रहेगी। हर एक क्लास में टीचर होगा। जो बच्चों की पढ़ाई पर पूरा ध्य़ान दे पाएगा। प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू हुई नीति अब अच्छे रिजल्ट दे रही है। इससे जिले भर के स्कूलों में शिक्षक की कमी पूरी हो पाएगी।
छत्तीसगढ़ की युक्तियुक्तकरण नीति शिक्षा में बदलाव ला रही है। संतुलित शिक्षक-छात्र अनुपात और 4,700 से ज़्यादा स्कूलों में नए शिक्षकों की नियुक्ति के साथ अब हर कक्षा में एक समर्पित शिक्षक मौजूद है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह सुधार सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।
प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू हुई नीति अब अच्छे रिजल्ट दे रही है। इससे जिले भर के स्कूलों में शिक्षक की कमी पूरी हो पाएगी। शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की क्लास में बढ़ोतरी भी लगातार अब हो रही है।
VIDEO | Chhattisgarh’s Yuktiyuktkaran or rationalisation policy is transforming education. With balanced teacher-student ratios and new teacher postings in over 4,700 schools, every classroom now has a dedicated guide. Under Chief Minister Vishnu Deo Sai’s leadership, this reform… pic.twitter.com/y4Ovuxmf3Z
— Press Trust of India (@PTI_News) July 18, 2025
छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा की अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक जरूरी कदम उठाया है। साय सरकार ने युक्तियुक्तकरण (Rationalization) प्रोसेस को सफलतापूर्वक लागू किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे लेकर साफ कहा है कि यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, सेंसिटिविटी और पॉलिसी बेस्ड दृष्टिकोण के साथ संपन्न की गई है और इसमें किसी भी शिक्षक के पद को खत्म नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि यह फैसला शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Bill of Rights Act) 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) 2020 के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है, ताकि राज्य की शिक्षा व्यवस्था ज्यादा प्रभावशाली बच्चों के लिए बन पाए। जब तक यह पॉलिसी लागू नहीं हुई थी। तो राज्य में कई ऐसे जिले शामिल हैं, जिनमें बिना शिक्षक के भी संचालन चल रहा था।
इस नीति के तहत राज्य में एजुकेशन लेवल अब अच्छा हो रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की इस पॉलिसी से न केवल एजुकेशन क्वालिटी में सुधार हो रहा है बल्कि समाज और स्कूल के बीच अच्छा कॉर्डिनेशन बन रहा है। इससे आने वाले टाइम में स्कूल में स्टूडेंट्स की प्रेजेंस, एग्जाम रिजल्ट और ओवरऑल एजुकेशन व्यवस्था को सशक्त बनाने में बहुत मजबूती से काम करेगी।
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