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छत्तीसगढ़

वेदांता पावर प्लांट हादसे में बड़ी कार्रवाई! चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 12 पर FIR, मिलेगा 35-35 लाख का मुआवजा

छत्तीसगढ़ के सक्ती में हुए दर्दनाक प्लांट हादसे के बाद वेदांता चेयरमैन समेत 12 पर FIR दर्ज की गई है. कंपनी ने मृतकों के परिजनों को भारी मुआवजे और नौकरी का एलान किया है. पढ़िये विपिन श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

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Edited By : Raja Alam Updated: Apr 16, 2026 23:12

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट के बाद प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 बेगुनाह मजदूरों की जान जा चुकी है, जबकि 16 अन्य मजदूर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं. पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत कुल 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. इन सभी पर बीएनएस की धारा 106 और 289 समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

दूसरे राज्यों से 15 मजदूर

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मरने वालों में 5 स्थानीय निवासी हैं, जबकि 15 मजदूर दूसरे राज्यों से यहां काम करने आए थे. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पूरी घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं और साफ कहा है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर श्रम कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई होगी. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. फिलहाल घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है.

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मुआवजे का बड़ा ऐलान

पीड़ित परिवारों की मदद के लिए सरकार और कंपनी दोनों ने मुआवजे का बड़ा ऐलान किया है. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है, जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी सहायता राशि जारी की है. वेदांता प्रबंधन ने भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए हर मृतक के परिवार को 35-35 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया है. इसके अलावा गंभीर रूप से घायल मजदूरों को भी 15-15 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी ताकि उनका जीवन दोबारा पटरी पर लौट सके.

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सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल

इस औद्योगिक हादसे ने एक बार फिर पावर प्लांट्स में सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि प्लांट में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई जिसकी कीमत मजदूरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी. फिलहाल सक्ती जिला प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और राहत कार्य के साथ-साथ जांच को भी आगे बढ़ाया जा रहा है. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे पता चलेगा कि असल में ब्लास्ट की वजह क्या थी.

First published on: Apr 16, 2026 11:12 PM

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