Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

Explainer

अमित शाह ने समझाया 850 लोकसभा सीटों का गणित, बताया- कैसे नहीं होगा दक्षिण को नुकसान

अमित शाह ने कहा कि अगर पूरे दक्षिण भारत के संदर्भ में देखें, तो अभी इन राज्यों के 129 सांसद 543 सीटों में करीब 23.76% हिस्सेदारी रखते हैं. नई लोकसभा में इन राज्यों के 195 सांसद होंगे और उनकी हिस्सेदारी 23.97% हो जाएगी.

Author
Written By: Prashant Dev Updated: Apr 16, 2026 21:34

संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर चल रही ऐतिहासिक बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ऐसा आंकड़ा पेश किया है, जिसे विपक्ष के आरोपों को पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है. विपक्ष की उन आशंकाओं को खारिज करते हुए कि परिसीमन से दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी, अमित शाह ने लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने का पूरा गणित समझाया.

क्या है ‘850 सीटों’ का फॉर्मूला?

विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि 850 एक राउंड फिगर है, जबकि तकनीकी रूप से यह संख्या 816 होगी. उन्होंने इसे एक सरल उदाहरण से समझाया – ‘अगर मान लीजिए किसी सदन में 100 सीटें हैं और हम महिलाओं को 33% आरक्षण देना चाहते हैं, तो हम सीटों की कुल संख्या 50% बढ़ाकर 150 कर देंगे. अब जब 150 सीटों पर 33% आरक्षण लागू होगा, तो वह संख्या वापस 100 के करीब आ जाएगी. यानी पुरुषों की मौजूदा 100 सीटों पर कोई आंच नहीं आएगी और महिलाओं को भी उनका हक मिल जाएगा.’

---विज्ञापन---

साथ ही कहा कि इसी फॉर्मूले के तहत, सरकार मौजूदा 543 सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है, जिससे कुल सीटें 816 हो जाएंगी. इससे महिला कोटा लागू करना आसान होगा और किसी भी राज्य की मौजूदा ताकत कम नहीं होगी.

दक्षिण भारत को नुकसान या फायदा?

विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप यह है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने से दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी और उत्तर भारत का दबदबा बढ़ जाएगा. अमित शाह ने डेटा पेश करते हुए इस नैरेटिव को ‘भ्रामक’ बताया.

---विज्ञापन---
  • कर्नाटक के पास अभी 28 सीटें हैं, जो 543 सीटों में 5.15% है. बिल पास होने के बाद कर्नाटक के सांसदों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी और लोकसभा में उसकी हिस्सेदारी 5.44% हो जाएगी. यानी कर्नाटक को कोई नुकसान नहीं होगा.
  • आंध्र प्रदेश के पास 25 सीटें हैं, जो 4.60% है. बिल के बाद सांसदों की संख्या 25 से बढ़कर 38 हो जाएगी और हिस्सेदारी 4.65% हो जाएगी.
  • तेलंगाना के पास 17 सीटें हैं, जो 3.13% है. बिल के बाद यह संख्या 17 से बढ़कर 26 हो जाएगी और हिस्सेदारी 3.18% हो जाएगी.
  • तमिलनाडु के पास 39 सीटें हैं, जो 7.18% है. बिल के बाद सांसदों की संख्या 59 हो जाएगी और नई 816 सदस्यीय लोकसभा में उसकी हिस्सेदारी 7.23% होगी. तमिलनाडु को भी कोई नुकसान नहीं होगा.
  • केरल के पास 20 सीटें हैं, जो 3.68% है. बिल के बाद सांसदों की संख्या 30 हो जाएगी और हिस्सेदारी 3.67% होगी.

शाह ने कहा कि अगर पूरे दक्षिण भारत के संदर्भ में देखें, तो अभी इन राज्यों के 129 सांसद 543 सीटों में करीब 23.76% हिस्सेदारी रखते हैं. नई लोकसभा में इन राज्यों के 195 सांसद होंगे और उनकी हिस्सेदारी 23.97% हो जाएगी. यानी दक्षिण का प्रभाव कम होने के बजाय मामूली रूप से बढ़ेगा ही

बिल पास कराने का जादुई आंकड़ा

इसके लिए सरकार को संसद में ‘विशेष बहुमत’ (दो-तिहाई) की जरूरत है. लोकसभा में यह संख्या 360 है, जबकि एनडीए के पास वर्तमान में 293 सदस्य हैं. यानी सरकार को इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए कम से कम 67 और सांसदों के समर्थन की दरकार होगी.

First published on: Apr 16, 2026 09:34 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.