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दंतेवाड़ा के ‘गणेश कर’ को मिला प्रवासी भारतीय का राजकिय सम्मान, जिले में खुशी की लहर

दंतेवाड़ा: विदेश में सामाजिक कल्याण, मानव संसाधन विकास , कला साहित्य और आर्थिक योगदान के लिए छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा नाचा (नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एशोशिएसन ) एवं ब्लड फार अस) के संस्थापक और एग्जीक्यूटिव प्रेसीडेंट गणेश कर को छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान’ के लिए चयनित किया हैं। राज्य के लिए दिए अनेक योगदान गणेश कर […]

दंतेवाड़ा: विदेश में सामाजिक कल्याण, मानव संसाधन विकास , कला साहित्य और आर्थिक योगदान के लिए छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा नाचा (नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एशोशिएसन ) एवं ब्लड फार अस) के संस्थापक और एग्जीक्यूटिव प्रेसीडेंट गणेश कर को छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान’ के लिए चयनित किया हैं।

राज्य के लिए दिए अनेक योगदान

गणेश कर की संस्था नाचा द्वारा समय समय पर भारत विशेषकर छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अनेक योगदान दिये हैं । कोरोना काल के विकट समय प्रवासी भारतीयों की सहायता से सहयोग राशी जुटाना, आक्सीजन कंस्ट्रेटर की व्यवस्था, यूक्रेन युद्ध में फंसे छात्रों की सहायता, छत्तीसगढ़ लोक संस्कृती का प्रचार प्रसार, छत्तीसगढ़ भाषा के शब्द कोष के लिए एप्लिकेशन बनाना, छत्तीसगढ़ शब्द कोष की रचना , व्यवसायियों के लिए बिजनस समिट, रक्तदान हेतू ब्लड फार अस की स्थापना, सहित अनेक कार्यो को देखते हुए इस पुरस्कार हेतु चुना गया ।

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शहर में उत्सव का माहौल

लौह नगरी बचेली में उत्साह का माहौल बन गया। बचेली के गणेश कर को प्रवासी भारतीय का राजकीय सम्मान प्राप्त होने का समाचार मिलते ही नगर पटाखों से गूंज उठा । परिजनों मित्रों सहित नगरवासियों नें आतिशबाजी एवं मिठाईयों से इस उपलब्धि का जश्न मनाया।

मंदिर प्रांगण में दी एक दूसरे को बधाई

खबर सुनते ही गणेश कर के बचपन के मित्र सहपाठी सहित नगरवासी राम मंदिर प्रांगण में जमा होकर एक दूसरे को बधाईयां देने लगे। दंतेवाड़ा जिले के बचेली शहर के शासकीय स्कूल से अध्यन प्रारंभ कर अमेरिका पहुंचने तक की यात्रा आसान नहीं थी। परंतु मेधावी गणेश नें शिक्षा के प्रति लगन दसवीं कक्षा में 100 में 100 अंक लाकर साबित कर दिया था। कबड्डी सहित अन्य खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन रहता था।

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बचपन के सहपाठी हरीश शर्मा नें बताया । सुदूर बस्तर संभाग के छोटे से शहर से नाचा (नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एशोशिएसन ) जैसे वैश्विक संगठन के मुखिया बनने के पीछे कठिन परिश्रम, परोपकार, जनकल्याण की भावना जैसे गुण हैं। प्रारंभ से ही कुछ विशेष करने की सोच रही हैं। अभी भी बचेली आने पर सहपाठियों, पुराने स्कूल एवं परिचितों से एकदम सामान्य व्यवहार करते हैं। इतने बड़े पद एवं सम्मान के बाद भी जड़ों से जुड़े रहने का गुण उन्हें बाकियों से अलग बनाता हैं।

First published on: Nov 02, 2022 07:51 PM

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