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छत्तीसगढ़

CG: नियद नेल्लानार योजना से बस्तर में लौटी रौनक, सुरक्षा और विकास ने भरे खुशहाली के रंग

Niyad Nellanar Scheme: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘नियद नेल्लानार योजना’ से बस्तर के आदिवासियों की जिंदगी बदलने लगी है।

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Edited By : Deepti Sharma Updated: Oct 26, 2024 16:22
Niyad Nellanar Scheme
Niyad Nellanar Scheme

Niyad Nellanar Scheme: छत्तीसगढ़ की साय सरकार लगातार विकास कार्यों को करने में जुटी हुई है। इसी के तहत गावों में हर तरह की सुविधा मिल पाए, इसके लिए प्रदेश सरकार कई योजनाएं चला रही है। नेचुरल रिसोर्सेज से भरपूर बस्तर के लोग अपनी संस्कृति और विशेष परंपराओं के लिए जाने जाते हैं।

कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने खुशहाल जीवन जीने के लिए खुद को प्रकृति के अनुकूल बनाए रखा, अपने को संभाले रखा, लेकिन पिछले कुछ सालों में उनके खुशहाल जीवन को माओवादियों की नजर लग गई थी, सड़कें सुनी हो गई और स्कूल बंद होने लगे थे।

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स्थानीय हाट बाजार भी बंद हो गए, जहां से स्थानीय लोग अपनी छोटी-छोटी जरूरतों की खरीदी करते थे। एक तरह से सबकी जिदंगी से खुशियों के रंग धीरे धीरे बेरंग हो गई। अब छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार की ‘नियद नेल्लानार योजना’ के जरिए न सिर्फ गांवों में विकास पहुंच रहा है, बल्कि बस्तर वासियों के जीवन में खुशहाली वापस आने लगी है। नक्सलवाद ने जो समस्याएं खड़ी की थीं, उससे ग्रामीणों के जीवन से रौनक गुम हो गई थी, जो इस योजना के जरिए वापस लौटने लगी है।

लोगों को मिल रहा योजनाओं का लाभ

माओवादी गतिविधियों के कारण शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का पूरा लाभ भी अंदरुनी इलाकों में स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा था। इस सब समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा ‘नियद नेल्ला नार‘ संचालित की जा रही है।

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जिसमें सुरक्षा कैम्पों के पांच किलोमीटर के दायरे वाले गांवों में केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ शत प्रतिशत हितग्राहियों तक पहुंचाने की मुहिम चलाई जा रही है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। स्थानीय हाट बाजार अब गुलजार होने लगे हैं। बंद पड़े हाट बाजार और स्कूल अब फिर से शुरू हो रहे हैं। जिससे बस्तर की तस्वीर बदलती जा रही है और बस्तर में फिर से रौनक लौटने लगी है।

नियद नेल्ला नार योजना आदिवासी क्षेत्रों में वामपंथी उग्रवाद को रोकने के लिए राज्य सरकार ने सुरक्षा और विकास की नीति को मूल मंत्र बनाया है। इसके सार्थक परिणाम दिख रहे हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ-साथ उन्हें सभी जरूरी सुविधाएं भी दी जा रही है।

बीते 9 महीनों के दौरान मुठभेड़ों में 156 माओवादियों को ढेर किया गया। पिछले 6 महीने में 32 फारवर्ड सुरक्षा कैम्पों की स्थापना की गई। निकट भविष्य में दक्षिण बस्तर और माड़ में रि-डिप्लायमेंट द्वारा 29 नए कैम्पों की स्थापना भी प्रस्तावित है।

योजना से बदल रही जिदंगी

नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना नक्सल प्रभावित इलाकों में गेम चेन्जर्स साबित हो रही है। माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित नए कैम्पों के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों और ग्रामीणों को 17 विभागों की 59 हितग्राहीमूलक योजनाओं और 28 सामुदायिक सुविधाओं के तहत आवास, अस्पताल, पानी, बिजली, पुल-पुलिया, स्कूल इत्यादि संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ के माओवादी आतंक प्रभावित जिलों के विद्यार्थियों को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के लिए ब्याज रहित ऋण मिलेगा।

सड़कों और पुल का निर्माण

आदिवासी समुदाय की बसाहट ज्यादातर वनांचल क्षेत्रों में है। इन क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। कई ऐसे हाट बाजार जो वीरान हो गए थे, वे अब फिर से गुलजार होने लगे हैं। माओवादी क्षेत्रों में बारहमासी सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे लोगों की मुसीबतें कम हुई हैं।

अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में पक्की सड़कों के निर्माण, स्कूलों के रेगुलर रुप से खुलने, उचित मूल्य दुकानों के बेहतर संचालन से बस्तर की तस्वीर बदलने लगी है। केन्द्र सरकार ने नगरनार में देश का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र भी शुरू किया है, इससे बस्तर अंचल के विकास को नई गति मिली है और लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

ग्रामीणों को मिली इंटरनेट सुविधा

नियद नेल्ला नार योजना का ही यह परिणाम है कि सुकमा जिले के अंदर के क्षेत्र के गांव नवापारा एल्मागुंडा में डीटीएच का इंस्टालेशन किया गया है, जिसका लाभ बच्चों के साथ-साथ ग्रामीण भी उठा रहे हैं। मनोरंजन के साथ ही वे देश-प्रदेश की खबरों से भी रूबरू हो रहे हैं। मोबाइल टॉवर लगने से ग्रामीण अब शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इसी तरह अंदरूनी गांवों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। जिससे ग्रामीण लोगों के जीवन में बदलाव आने लगा है।

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First published on: Oct 26, 2024 04:22 PM

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