लैंड फॉर जॉब केस क्या है? इस केस को लेकर चर्चा तेज गई है, आज कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत परिवार के छह लोगों पर आरोप तय किए हैं. दरअसल, यह मामला रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने से जुड़ा है. आइए विस्तार से इसके बारे में जानते हैं.
लैंड फॉर जॉब स्कैम क्या है और कब हुआ?
लैंड फॉर जॉब स्कैम वह मामला है जिसमें रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन लेने के आरोप लगाए गए हैं. साल 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को जीत मिली थी. लालू यादव की पार्टी ने 24 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसी वजह से लालू यादव मनमोहन सरकार में रेल मंत्री बने. लालू यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहे. इसी दौरान मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित इंडियन रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप डी कैटेगरी में भर्तियां हुईं. आरोप है कि ये भर्तियां नियमों को दरकिनार करके की गईं और इसके पीछे निजी फायदे का मकसद था.
इस केस की जांच 2020 के बाद तेज हुई जब सीबीआई और ईडी ने बिहार और दिल्ली के कई ठिकानों पर छापेमारी की. इन कार्रवाइयों के बाद 18 मई 2022 को सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज किया. जांच एजेंसियों का कहना है कि यह स्कैम कई सालों तक चला और इसमें नौकरी पाने के लिए जमीन को माध्यम बनाया गया.
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चार्जशीट से खुली लैंड फॉर जॉब स्कैम की पूरी सच्चाई
जमीन के बदले नौकरी मामले में 7 अक्तूबर 2022 को सीबीआई ने पहली चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद जून 2024 में इस केस की अंतिम चार्जशीट पेश की गई. सीबीआई ने इस पूरे मामले में कुल 78 लोगों को आरोपी बनाया. इनमें 38 ऐसे लोग शामिल बताए गए जिन्होंने रेलवे में नौकरी पाने के लिए जमीन दी थी. जांच एजेंसी के अनुसार यह लेन देन नियमों के खिलाफ था और इसमें सरकारी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया गया. चार्जशीट में कई दस्तावेजी सबूतों और गवाहों का जिक्र भी किया गया है.









